
झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले के अकलेरा थाना क्षेत्र में पिछले कई महीनों से रहस्य बना ‘रेणु हत्याकांड’ आखिरकार पुलिस की पैनी नजर और वैज्ञानिक जांच के सामने टूट गया। जिस मौत को ससुराल पक्ष ने ‘सीढ़ियों से गिरने का हादसा’ बताकर रफा-दफा करने की पुरजोर कोशिश की थी, वह दरअसल एक रोंगटे खड़े कर देने वाली सोची-समझी हत्या निकली। झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने मंगलवार सुबह 11 बजे पुलिस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इस सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया कि मुख्य आरोपी पति देवीकृपाल उर्फ डेविड को कोटा से गिरफ्तार कर लिया गया है।
यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि पुलिस को गुमराह करने और कानून की आँखों में धूल झोंकने की एक शातिर साजिश का भी था।
घटनाक्रम और पुलिस की सूझबूझ:
मामले की शुरुआत 9 नवंबर 2025 को हुई थी, जब अकलेरा के ग्राम चंदीपुर में 27 वर्षीय रेणु उर्फ निमंता की उसके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। ससुराल वालों ने तत्काल शोर मचाया कि रेणु सीढ़ियों से फिसल गई और चोट लगने से उसकी जान चली गई। परिजनों ने इसे एक सामान्य दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया। लेकिन, झालावाड़ पुलिस की ‘इंटेलिजेंस विंग’ को कुछ गोपनीय इनपुट मिले, जिनसे संकेत मिला कि कहानी वैसी नहीं है जैसी बताई जा रही है।
एसपी अमित कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद कमान संभाली। जब पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया, तो वहां मौजूद साक्ष्य ‘दुर्घटना’ की थ्योरी को सिरे से खारिज कर रहे थे। कमरे में सामान बिखरा हुआ था, फर्श पर चूड़ियों के टुकड़े और खून के धब्बे चीख-चीख कर बता रहे थे कि वहां संघर्ष हुआ था।
वैज्ञानिक अनुसंधान और फोरेंसिक की ताकत:
झालावाड़ पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए क्राइम सीन रिक्रिएशन (Crime Scene Recreation) तकनीक का सहारा लिया। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने सीढ़ियों से गिरने की स्थिति और शरीर पर लगी चोटों का मिलान किया। मेडिकल रिपोर्ट में रेणु के शरीर पर संघर्ष और मारपीट के गंभीर निशान पाए गए थे। शरीर पर नीले निशान, फटी हुई मैक्सी और टूटी हुई चूड़ियाँ स्पष्ट कर रही थीं कि मौत से पहले रेणु ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों ने आरोपी पति की लोकेशन और बयानों में विरोधाभास को उजागर कर दिया।
गिरफ्तारी के दौरान खूनी ड्रामा:
जब पुलिस टीम आरोपी देवीकृपाल उर्फ डेविड को पकड़ने कोटा पहुँची, तो आरोपी ने भागने के लिए दुस्साहस की सारी हदें पार कर दीं। गिरफ्तारी से बचने के लिए डेविड ने अपनी गाड़ी से पुलिस की टीम पर जानलेवा हमला कर दिया और उन्हें कुचलने की कोशिश की। झालावाड़ पुलिस के जवानों ने बहादुरी दिखाते हुए खुद को संभाला और घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। इस संबंध में कोटा में आरोपी के खिलाफ राजकार्य में बाधा और जानलेवा हमले का एक और गंभीर मामला दर्ज किया गया है।
Pirawa Times विशेष: न्याय की जीत और समाज के लिए कड़ा संदेश
- शातिर चाल बनाम खाकी की पैनी नज़र: क्या आरोपी डेविड को लगा था कि वह ‘सीढ़ियों से गिरने’ का बहाना बनाकर कानून से बच जाएगा? झालावाड़ पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी कितना भी रसूखदार या चालाक क्यों न हो, फोरेंसिक साक्ष्य झूठ नहीं बोलते।
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समाज की चुप्पी पर सवाल: आखिर चंदीपुर गांव के लोग उस वक्त खामोश क्यों रहे जब एक विवाहिता के साथ संघर्ष हो रहा था? क्या सामाजिक दबाव ने सच को दबाने की कोशिश की?
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पुलिस की निष्पक्षता: इस मामले में पुलिस ने बिना किसी परिवादी के इंतजार किए, खुद ही हेड कांस्टेबल सतवीर सिंह की रिपोर्ट पर केस दर्ज कर जांच शुरू की। यह दर्शाता है कि पुलिस अब केवल रिपोर्ट का इंतजार नहीं करती, बल्कि अपराध को जड़ से मिटाने के लिए खुद सक्रिय है।
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घरेलू हिंसा का भयावह चेहरा: 27 साल की उम्र में रेणु की मौत कई सवाल छोड़ गई है। क्या ससुराल में उसे लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा था? डेविड की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस को उन सभी पहलुओं पर जांच करनी चाहिए जिन्होंने इस जुर्म को छिपाने में आरोपी की मदद की।







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