BREAKING NEWS: • Cyber Security: Savdhan Rahein, Surakshit Rahein • चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल—क्या पानी खत्म होने के बाद शुरू होगा अवैध खनन? • पिड़ावा की सबसे बड़ी चुनौती: क्या राजू माली दूर कर पाएंगे वर्षों पुरानी ड्रेनेज समस्या? • पिड़ावा का सियासी खेल: चुनाव में अलग-अलग विकल्प, अध्यक्ष चुनाव में साथ-साथ! • पिड़ावा में शोक की लहर: अखंड हिंदू समाज अध्यक्ष महावीर लुहार का निधन • उप जिला अस्पताल पिड़ावा को मिली हाई क्वालिटी नेबुलाइजर मशीन, विमल जैन ने किया डोनेशन • पिड़ावा में अध्यक्ष पद सामान्य होते ही सियासी पारा चढ़ा, अब किसके सिर सजेगा नगर पालिका का ताज? • पिड़ावा नगर पालिका के 20 वार्डों का आरक्षण जारी, कहीं सामान्य तो कहीं महिला और ओबीसी को मौका • 17 अगस्त को खुलेगा पिड़ावा के 20 वार्डों का चुनावी पिटारा, आरक्षण लॉटरी पर टिकी दावेदारों की नजर • पिड़ावा नगर पालिका अध्यक्ष पद की लॉटरी में अनारक्षित सीट, सियासी समीकरण बदले
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Cyber Security: Savdhan Rahein, Surakshit Rahein

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Aaj humari zindagi internet ke bina imagine karna mushkil hai.

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चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल—क्या पानी खत्म होने के बाद शुरू होगा अवैध खनन?

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चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल
चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल—क्या पानी खत्म होने के बाद शुरू होगा अवैध खनन?

खेजड़िया रोड स्थित एनीकट में पानी रोकने की व्यवस्था पर सवाल, पिछले साल भी रही थी ऐसी स्थिति; जल संरक्षण के साथ नदी की सुरक्षा भी चुनौती

पिड़ावा। मानसून का दौर समाप्त होने के बाद पिड़ावा के खेजड़िया रोड स्थित चवली नदी के एनीकट में जमा पानी को संरक्षित करने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एनीकट में पानी मौजूद होने के बावजूद यदि समय रहते गेट नहीं लगाए गए और पानी लगातार बहता रहा तो आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर तेजी से कम हो सकता है।
मामला केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है। पानी कम होने के बाद चवली नदी का नदी क्षेत्र खुलने पर वहां अवैध खनन की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में एनीकट में पानी रोकने की व्यवस्था नहीं होना नदी के पर्यावरण और जल संरक्षण के साथ-साथ अवैध खनन की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

पिड़ावा की सबसे बड़ी चुनौती: क्या राजू माली दूर कर पाएंगे वर्षों पुरानी ड्रेनेज समस्या?

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नई नगर पालिका बोर्ड के सामने सबसे बड़ा सवाल—ड्रेनेज सिस्टम सुधरेगा या समस्या जस की तस रहेगी?

पिड़ावा। नगर पालिका चुनाव 2026 के बाद पिड़ावा को नया अध्यक्ष मिल चुका है। भाजपा के राजू माली नगर पालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव में उन्हें 20 में से 12 वोट मिले।
अब चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहरवासियों की नजर नगर पालिका के नए बोर्ड के कामकाज पर है। इनमें पिड़ावा की वर्षों पुरानी ड्रेनेज सिस्टम की समस्या सबसे प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
बारिश के दिनों में जल निकासी की व्यवस्था को लेकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में परेशानी सामने आती रही है। नालियों की सफाई, पानी की निकासी और व्यवस्थित ड्रेनेज नेटवर्क जैसे मुद्दे लंबे समय से नगर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल बने हुए हैं।

पिड़ावा का सियासी खेल: चुनाव में अलग-अलग विकल्प, अध्यक्ष चुनाव में साथ-साथ!

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जनता ने दिए अलग-अलग जनादेश, पार्षदों के फैसले ने बदल दिया पूरा गणित… सबसे बड़ा सवाल—भाजपा और AAP के बीच आखिर कैसे बनी सहमति?

टिप्पणी

                    नगर पालिका का चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन इसके बाद बना सियासी समीकरण अब शहर की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है। वार्ड चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी अलग-अलग राजनीतिक विकल्प के रूप में मैदान में थीं, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में दोनों के पार्षद एक ही तरफ नजर आए। यही घटनाक्रम अब पिड़ावा की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

20 वार्डों वाली पिड़ावा नगर पालिका में चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस 8 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल, भाजपा 6, आप  5 और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। बहुमत के लिए 11 पार्षदों की जरूरत थी, यानी किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं था।
यहीं से शुरू हुआ असली सियासी गणित, 6, 1 और 5 का जोड़ बना 12 का आंकड़ा
अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा के राजू माली को 12 वोट मिले और वे अध्यक्ष निर्वाचित हुए। कांग्रेस के रणजीत सिंह चौहान को 8 वोट मिले। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार भाजपा के 6 पार्षदों के साथ आप के 5 पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में गया।
यानी जिस सदन में चुनाव के बाद भाजपा के पास 6 और आप के पास 5 पार्षद थे, वही 6+5+1 का आंकड़ा अध्यक्ष चुनाव में 11 का बहुमत पार करते हुए 12 तक पहुंच गया।
और यहीं से सवालों का सिलसिला शुरू होता है।
चुनाव में अलग पहचान… फिर साथ आने का आधार क्या रहा?
मतदाता जब वोट डालने गया था, उसके सामने कांग्रेस, भाजपा,आप और निर्दलीय—अलग-अलग विकल्प थे। लेकिन अध्यक्ष चुनाव के समय भाजपा और आप के पार्षद एक ही पक्ष में मतदान करते दिखाई दिए।

यह सवाल किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए है—आखिर भाजपा और आप के बीच यह सहमति किस आधार पर बनी?

क्या यह स्थानीय स्तर पर बोर्ड के गठन और स्थिरता को लेकर फैसला था?
क्या विकास कार्यों को लेकर कोई साझा समझ बनी?
क्या पार्षदों के बीच पहले से कोई बातचीत हुई थी?
या फिर चुनाव के बाद बने संख्या बल ने दोनों पक्षों को एक साथ आने की स्थिति पैदा की?
इन सवालों के जवाब संबंधित पार्षद और दोनों राजनीतिक पक्ष ही स्पष्ट रूप से दे सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल: वोट का मतलब क्या था?
पिड़ावा का घटनाक्रम एक दिलचस्प लोकतांत्रिक सवाल भी सामने रखता है।
मतदाता ने पार्षद चुनने के लिए वोट दिया था या चुनाव के बाद बनने वाले बोर्ड के लिए भी कोई राजनीतिक दिशा तय की थी?
कानूनी व्यवस्था के तहत अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाता है। इसलिए अध्यक्ष पद का चुनाव वार्ड चुनाव से अलग चरण है। पिड़ावा में भी यही हुआ—वार्डों के परिणाम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही, लेकिन अध्यक्ष पद के मतदान में भाजपा प्रत्याशी को बहुमत मिल गया।
लेकिन राजनीतिक तौर पर सवाल यह है कि चुनाव के दौरान अलग-अलग नजर आने वाले राजनीतिक दल चुनाव के बाद सत्ता के समीकरण में एक साथ कैसे आए?
यही सवाल अब पिड़ावा की हर गली, हर मोहल्ले और चाय की टपरी तक पहुंच चुका है।
कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी अध्यक्ष पद हाथ से गया
कांग्रेस के पास 8 पार्षद होने के बावजूद अध्यक्ष पद उसके खाते में नहीं आया। भाजपा के 6 पार्षद थे, लेकिन आप के 5 और एक निर्दलीय के समर्थन से उसका आंकड़ा 12 तक पहुंच गया।
इस पूरे घटनाक्रम में आप के पांच पार्षद निर्णायक स्थिति में थे। उनके समर्थन के बिना भाजपा के 6 पार्षद बहुमत के 11 के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकते थे।
यही वजह है कि पिड़ावा में अब चर्चा सिर्फ “अध्यक्ष कौन बना?” तक सीमित नहीं है।
चर्चा यह है—
“चुनाव में अलग-अलग खड़े दो राजनीतिक विकल्प, चुनाव के बाद एक ही सत्ता समीकरण में कैसे आ गए?”
और इसका जवाब आने वाले दिनों में भाजपा और आप के स्थानीय नेताओं तथा पार्षदों के बयानों से और साफ हो सकता है।
पिड़ावा ने वार्डों में अपना जनादेश दे दिया। पार्षदों ने अध्यक्ष पद का फैसला कर दिया। अब शहर यह देखेगा कि यह नया सियासी समीकरण आगे नगर पालिका के कामकाज में किस रूप में दिखाई देता है।
फिलहाल पिड़ावा की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है—
“चुनाव में अलग-अलग… और अध्यक्ष
उपाध्यक्ष चुनाव में साथ-साथ, आखिर कैसे?”

पिड़ावा में शोक की लहर: अखंड हिंदू समाज अध्यक्ष महावीर लुहार का निधन

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पिड़ावा में शोक की लहर
अखंड हिंदू समाज अध्यक्ष महावीर लुहार का निधन

कोटा में उपचार के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन, 22 सितंबर को होने वाले डोल यात्रा महोत्सव की तैयारियों में जुटे थे

पिड़ावा। अखंड हिंदू समाज के अध्यक्ष महावीर लुहार के आकस्मिक निधन की खबर से पिड़ावा नगर में शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी के अनुसार महावीर लुहार का कोटा में उपचार के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
महावीर लुहार सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। वे लंबे समय से रामलीला में हनुमानजी का किरदार निभाते आ रहे थे और धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद शहर में उनके परिचितों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों में शोक की भावना है।

उप जिला अस्पताल पिड़ावा को मिली हाई क्वालिटी नेबुलाइजर मशीन, विमल जैन ने किया डोनेशन

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उप जिला अस्पताल पिड़ावा को मिली हाई क्वालिटी नेबुलाइजर मशीन
उप जिला अस्पताल पिड़ावा को मिली हाई क्वालिटी नेबुलाइजर मशीन, विमल जैन ने किया डोनेशन

ओपीडी और इमरजेंसी में मरीजों के उपचार में मिलेगी सुविधा, जरूरत के समय अस्पताल के लिए उपयोगी साबित होगी मशीन

पिड़ावा। उप जिला अस्पताल पिड़ावा की ओपीडी एवं इमरजेंसी सेवाओं में नेबुलाइजर मशीन की आवश्यकता को देखते हुए शनिवार को समाजसेवी विमल जैन, नयापुरा मिठाई वाले की ओर से अस्पताल को एक उच्च गुणवत्ता वाली नेबुलाइजर मशीन डोनेट की गई।
अस्पताल में सांस से जुड़ी तकलीफ, अस्थमा, एलर्जी एवं अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से आने वाले मरीजों के उपचार में नेबुलाइजर मशीन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। विशेषकर इमरजेंसी के दौरान इसकी उपलब्धता मरीजों को तत्काल उपचार देने में मददगार होती है।

पिड़ावा में अध्यक्ष पद सामान्य होते ही सियासी पारा चढ़ा, अब किसके सिर सजेगा नगर पालिका का ताज?

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पिड़ावा का सियासी खेल:
पिड़ावा का सियासी खेल: चुनाव में अलग-अलग विकल्प, अध्यक्ष चुनाव में साथ-साथ!

20 वार्डों की आरक्षण तस्वीर साफ, अब भाजपा-कांग्रेस में टिकट के लिए शुरू होगी असली जंग; हर गली, मोहल्ले और चाय की टपरी पर अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाओं का दौर

पिड़ावा। नगर पालिका चुनाव 2026 को लेकर पिड़ावा की सियासत में अब असली हलचल शुरू हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष पद के सामान्य होने के साथ ही राजनीतिक समीकरणों ने अचानक नई करवट ले ली है। वहीं दूसरी ओर नगर पालिका के सभी 20 वार्डों के आरक्षण की तस्वीर भी साफ हो चुकी है। ऐसे में अब चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजरें पूरी तरह राजनीतिक दलों के टिकट वितरण पर टिक गई हैं।
अध्यक्ष पद सामान्य होने की खबर सामने आते ही पिड़ावा की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं रह गया कि कौन पार्षद बनेगा, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार पिड़ावा नगर पालिका की कुर्सी पर आखिर किसका कब्जा होगा? यही सवाल इन दिनों शहर की हर गली, हर मोहल्ले, हर नुक्कड़ और यहां तक कि चाय की टपरी तक पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

पिड़ावा नगर पालिका के 20 वार्डों का आरक्षण जारी, कहीं सामान्य तो कहीं महिला और ओबीसी को मौका

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पिड़ावा। नगर पालिका चुनाव 2026 को लेकर लंबे समय से वार्ड आरक्षण का इंतजार कर रहे संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। नगर पालिका पिड़ावा के 20 वार्डों का आरक्षण जारी होने के बाद कई दावेदारों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। आरक्षण की घोषणा के साथ ही कहीं संभावित उम्मीदवारों के चेहरों पर खुशी नजर आई तो कहीं लंबे समय से तैयारी कर रहे दावेदारों को निराशा का सामना करना पड़ा।
नगर पालिका पिड़ावा के वार्ड नंबर 1 को सामान्य, वार्ड नंबर 2 को सामान्य तथा वार्ड नंबर 3 को सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इसी क्रम में वार्ड नंबर 4 सामान्य, वार्ड नंबर 5 अनुसूचित जाति, वार्ड नंबर 6 सामान्य और वार्ड नंबर 7 सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ है।
वहीं वार्ड नंबर 8 सामान्य रखा गया है, जबकि वार्ड नंबर 9 और वार्ड नंबर 10 को सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है। वार्ड नंबर 11, 12, 13 और 14 सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं। इसके बाद वार्ड नंबर 15 को ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
आरक्षण की जारी सूची के अनुसार वार्ड नंबर 16 सामान्य, वार्ड नंबर 17 ओबीसी, वार्ड नंबर 18 ओबीसी तथा वार्ड नंबर 19 भी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं वार्ड नंबर 20 सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है।

आरक्षण के बाद बदले चुनावी समीकरण

वार्ड आरक्षण सामने आने के बाद अब पिड़ावा की राजनीति में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। पिछले कई महीनों से अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क कर रहे दावेदारों की निगाहें आरक्षण की प्रक्रिया पर टिकी हुई थीं। अब आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद दावेदारों को यह तय करने का मौका मिलेगा कि उन्हें किस वार्ड से चुनावी मैदान में उतरना है और किस रणनीति के साथ आगे बढ़ना है।
खास बात यह है कि कुछ वार्ड सामान्य होने से पुराने दावेदारों के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता खुला है, तो वहीं महिला आरक्षण वाले वार्डों में कई नए चेहरों के सामने आने की संभावना है। ओबीसी और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों में भी संबंधित वर्ग के संभावित उम्मीदवारों की राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के आसार हैं।

किसी के लिए खुशी, किसी के लिए झटका

आरक्षण की घोषणा ने कई संभावित उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित किया है। जिन दावेदारों के वार्ड उनकी मनचाही श्रेणी में आए हैं, उनके लिए यह खबर किसी खुशखबरी से कम नहीं है। वहीं जिन उम्मीदवारों के वार्ड महिला, ओबीसी या अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं, उन्हें अब नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।
पिड़ावा में नगर पालिका चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक हलचल बनी हुई है। अब वार्ड आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद टिकट की दावेदारी, नए समीकरण, संभावित प्रत्याशियों की तलाश और राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर तेज होने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में यह देखना खासा दिलचस्प होगा कि कौन से पुराने दावेदार मैदान में डटे रहते हैं, कौन दूसरे वार्ड का रुख करते हैं और किन नए चेहरों को राजनीतिक दल मौका देते हैं। वार्ड आरक्षण ने पिड़ावा के आगामी नगर पालिका चुनाव की सियासी बिसात को काफी हद तक तैयार कर दिया है। अब सबकी निगाहें प्रत्याशियों की घोषणा और चुनावी मैदान में उतरने वाले चेहरों पर टिकी हैं।

17 अगस्त को खुलेगा पिड़ावा के 20 वार्डों का चुनावी पिटारा, आरक्षण लॉटरी पर टिकी दावेदारों की नजर

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17 अगस्त को खुलेगा पिड़ावा के 20 वार्डों का चुनावी पिटारा
17 अगस्त को खुलेगा पिड़ावा के 20 वार्डों का चुनावी पिटारा, आरक्षण लॉटरी पर टिकी दावेदारों की नजर

लॉटरी के बाद कहीं उम्मीदवारों को लगेगा झटका तो कहीं बदल सकती है किस्मत, आरक्षण तय होते ही बदलेंगे चुनावी समीकरण

पिड़ावा। नगर पालिका आम चुनाव-2026 को लेकर पिड़ावा में चुनावी सरगर्मी तेज होने लगी है। संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की निगाहें अब 17 अगस्त 2026 को होने वाली वार्ड आरक्षण की लॉटरी पर टिकी हुई हैं। पिड़ावा नगर पालिका के 20 वार्डों में किस वार्ड को किस श्रेणी के लिए आरक्षित किया जाएगा, इसका फैसला आरक्षण प्रक्रिया के बाद होगा। इसके साथ ही लंबे समय से चुनावी तैयारी में जुटे संभावित दावेदारों के समीकरण भी सामने आ जाएंगे।
जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ के अनुसार स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान के निर्देशों की अनुपालना में पिड़ावा के 20 वार्डों का आरक्षण 17 अगस्त को दोपहर 3 बजे मिनी सचिवालय, झालावाड़ के सभा भवन में किया जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया नियमानुसार एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाएगी।

पिड़ावा नगर पालिका अध्यक्ष पद की लॉटरी में अनारक्षित सीट, सियासी समीकरण बदले

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पिड़ावा नगर पालिका अध्यक्ष पद की लॉटरी में अनारक्षित सीट
पिड़ावा नगर पालिका अध्यक्ष पद की लॉटरी में अनारक्षित सीट, सियासी समीकरण बदले
पिड़ावा। नगर पालिका चुनाव को लेकर पिड़ावा की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए हुई आरक्षण लॉटरी में इस बार अनारक्षित वर्ग की सीट निकली है। आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही अध्यक्ष पद के दावेदारों और राजनीतिक खेमों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
खास बात यह है कि पिछले नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद ओबीसी (अनारक्षित) वर्ग के लिए आरक्षित था, जबकि इस बार लॉटरी में अनारक्षित सीट आने से चुनावी मुकाबले के समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। लंबे समय से अध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे कई संभावित दावेदारों के लिए यह लॉटरी नए अवसर लेकर आई है।
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