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झालावाड़ में जोश की दौड़: खेल संकुल से गढ़ पैलेस तक गूँजे प्रगति के नारे

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'विकसित राजस्थान रन' में उमड़ा जनसैलाब
खेल संकुल से गढ़ पैलेस तक गूँजे प्रगति के नारे
झालावाड़। राजस्थान स्थापना दिवस 2026 के गौरवमयी आयोजनों की श्रृंखला में आज झालावाड़ जिला मुख्यालय पर एक भव्य दृश्य देखने को मिला। जिला प्रशासन और जिला खेलकूद प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “विकसित राजस्थान रन (मैराथन) – 2026” ने शहर की फिजा में देशभक्ति और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का रंग घोल दिया। इस मैराथन में केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों और प्रशासनिक अधिकारियों ने एक साथ कदमताल करते हुए यह संदेश दिया कि एक विकसित राज्य की नींव उसके नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य पर टिकी होती है।

केसरी धूप में मैराथन का भव्य आगाज

​रविवार की सुबह जब सूरज की पहली किरणें झालावाड़ की धरा पर पड़ीं, तब तक श्रीमती विजयराजे सिंधिया राजकीय खेल संकुल प्रतिभागियों से खचाखच भर चुका था। मैराथन का औपचारिक शुभारंभ अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) अनुराग भार्गव और पीटीएस कमांडेंट गोपीचंद मीणा द्वारा किया गया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर धावकों को रवाना किया। जैसे ही झंडी दिखाई गई, पूरा खेल परिसर “वंदे मातरम” और “विकसित राजस्थान” के नारों से गूँज उठा। धावकों के चेहरों पर न केवल प्रतियोगिता जीतने की ललक थी, बल्कि अपने प्रदेश के स्थापना दिवस को यादगार बनाने का गौरव भी साफ झलक रहा था।
झालावाड़ में जोश की दौड़
झालावाड़ में जोश की दौड़

शहरी मार्गों पर दिखा जन-उत्साह

​मैराथन खेल संकुल से प्रारंभ होकर शहर के हृदय स्थलों से गुजरी। यह दौड़ मल्होत्रा चौराहा, निर्भय सिंह सर्किल, मुख्य बस स्टैंड और व्यस्ततम मंगलपुरा बाजार होते हुए ऐतिहासिक गढ़ पैलेस स्थित स्काउट कार्यालय पर जाकर संपन्न हुई। मैराथन के पूरे मार्ग में शहरवासियों का उत्साह देखते ही बनता था। लोग अपने घरों की छतों और दुकानों के बाहर खड़े होकर धावकों का तालियां बजाकर उत्साहवर्धन कर रहे थे। प्रतिभागियों के जोश को बढ़ाने के लिए जगह-जगह स्वयंसेवी संगठनों द्वारा पानी और ग्लूकोज की व्यवस्था भी की गई थी।

समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी

​इस मैराथन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘विविधता’ रही। इसमें झालावाड़ के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। उनके साथ उनके खेल प्रशिक्षक भी दौड़ रहे थे। प्रशासन की ओर से पुलिस के जवान, पीटीएस (पुलिस ट्रेनिंग स्कूल) के कैडेट्स, स्काउट गाइड के सदस्य और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दौड़ में शामिल होकर अपनी फिटनेस का परिचय दिया। स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी इसमें भाग लेकर यह साबित किया कि राजस्थान के विकास के लिए हर हाथ और हर पैर एक साथ चलने को तैयार है।

सुरक्षा और सुगम यातायात की मिसाल

​हजारों की भीड़ होने के बावजूद मैराथन के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रही। जिला पुलिस प्रशासन ने पहले से ही रूट चार्ट तैयार कर रखा था। हर प्रमुख चौराहे पर पुलिस बल तैनात था, जिन्होंने धावकों के मार्ग को सुरक्षित रखा और आम जनता को भी आवागमन में असुविधा नहीं होने दी। एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें भी किसी भी आपात स्थिति के लिए मैराथन के साथ-साथ चल रही थीं।

विकसित राजस्थान का संकल्प और समापन

​गढ़ पैलेस पहुंचने पर एक संक्षिप्त समापन समारोह का आयोजन किया गया। यहाँ उपस्थित मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) राम सिंह मीणा, जिला खेल अधिकारी डॉ. कृपाशंकर शर्मा, और डॉ. अलीम बैग ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह हमारे शौर्य, संस्कृति और भविष्य की योजनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने आह्वान किया कि जिस ऊर्जा के साथ आज युवा सड़क पर दौड़े हैं, उसी ऊर्जा के साथ उन्हें शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक सरोकारों में भी दौड़ना होगा ताकि ‘विकसित राजस्थान’ का सपना समय से पहले पूरा हो सके।
​कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को राजस्थान दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं दी गईं। उपस्थित अधिकारियों ने सभी से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में खेलों और योग को स्थान दें ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।

📱 Pirawa Times विशेष: बदलता झालावाड़, दौड़ता राजस्थान

  • स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता: मैराथन जैसे आयोजन युवाओं को नशे और खराब जीवनशैली से दूर कर खेलों की ओर प्रेरित करते हैं। झालावाड़ जिला प्रशासन की यह पहल सराहनीय है।
  • प्रशासनिक संवेदनशीलता: एडीएम और कमांडेंट स्तर के अधिकारियों का स्वयं उपस्थित होकर युवाओं का उत्साह बढ़ाना यह दर्शाता है कि शासन और जनता के बीच की दूरियां कम हो रही हैं।
  • विकास का विजन: 2026 तक राजस्थान ने शिक्षा और बुनियादी ढांचे में जो प्रगति की है, यह मैराथन उस ‘विकसित’ होने की रफ़्तार का एक छोटा सा ट्रेलर मात्र है।

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