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सरहदें अलग पर आस्था एक! मध्य प्रदेश के सहकारिता एवं खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग पहुँचे पिड़ावा; सूरजकुंड धाम में विधि-विधान से किया अभिषेक

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सूरजकुंड में विधि-विधान से किया अभिषेक
मध्य प्रदेश के सहकारिता एवं खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग पहुँचे पिड़ावा; सूरजकुंड में विधि-विधान से किया अभिषेक
पिड़ावा। राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते समन्वय और धार्मिक जुड़ाव के बीच आज पिड़ावा नगर के लिए एक गौरवशाली क्षण रहा। मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर नेता और सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग आज संक्षिप्त प्रवास पर पिड़ावा पहुँचे। मंत्री के आगमन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। अपने इस दौरे के दौरान मंत्री सारंग ने राजनीति से इतर अध्यात्म को प्राथमिकता देते हुए पिड़ावा के ऐतिहासिक और आस्था के प्रमुख केंद्र श्री सूरजकुंड मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की।

जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार स्वागत

ऐतिहासिक सूरजकुंड में विधि-विधान से पूजन:

मंत्री विश्वास सारंग ने सूरजकुंड मंदिर के पावन परिसर में पहुँचकर भगवान के दर्शन किए और पूरे विधि-विधान के साथ अभिषेक व आरती की। मंदिर के मुख्य पुजारी सुनील शर्मा के सानिध्य में उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ क्षेत्र एवं मध्य प्रदेश-राजस्थान दोनों प्रदेशों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर की प्राचीनता और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को देखकर मंत्री अभिभूत नजर आए। उन्होंने मंदिर परिसर के सौंदर्य और वहां की व्यवस्थाओं की भी सराहना की।
वही हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर पिड़ावा नगर के ऐतिहासिक ‘माता जी की बाड़ी’ परिसर में आयोजित सुंदरकांड पाठ एवं भव्य धार्मिक अनुष्ठान बुधवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की भव्यता उस समय और बढ़ गई जब मध्य प्रदेश सरकार के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग और राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव ने विशेष रूप से शिरकत की। वशिष्ठ ज्योतिष संस्थानम् द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में राजस्थान और मध्य प्रदेश के रामभक्तों का समागम देखने को मिला।

मंत्रमुग्ध कर देने वाला सुंदरकांड पाठ:

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य श्री अनिल जी शर्मा के मुखारविंद से हुआ सुंदरकांड का सुमधुर पाठ रहा। अनिल जी शर्मा की ओजस्वी वाणी ने पंडाल में उपस्थित हर श्रद्धालु को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया। महामंडलेश्वर स्वामी श्री पद्मनाभ शरण देवाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य ने पूरे आयोजन को एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।  इस अनुष्ठान में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की चौपाइयों पर भक्त झूमते नजर आए।

ब्राह्मण एवं कन्या पूजन का दिव्य आयोजन:

हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन उपलक्ष्य में आयोजक मंडल की ओर से ब्राह्मण एवं कन्या पूजन का विशेष आयोजन किया गया। “हनुमान जी शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं, और पिड़ावा की इस धरा पर रामभक्ति की यह बयार देखकर मन प्रफुल्लित है।” उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।

जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार स्वागत:

जैसे ही मंत्री का काफिला पिड़ावा की सीमा में प्रवेश हुआ, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ भाजपा नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने पुष्पहार और नारों के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया। मंदिर परिसर में भी भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने मंत्री का अभिनंदन किया। मंत्री सारंग ने भी सहजता के साथ सभी का अभिवादन स्वीकार किया और कार्यकर्ताओं से संक्षिप्त संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।

धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय महत्व:

इस दौरे को राजनीतिक गलियारों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिड़ावा और मध्य प्रदेश की सीमाएं आपस में सटी हुई हैं, ऐसे में एक कैबिनेट मंत्री का इस ऐतिहासिक मंदिर में आना भविष्य में धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को बढ़ावा देने का बड़ा संकेत है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरों से सीमावर्ती क्षेत्रों के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार और वहां यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है।
​मंत्री के इस दौरे से स्थानीय लोगों में यह उम्मीद जगी है कि सूरजकुंड मंदिर, जो कि क्षेत्र की अमूल्य धरोहर है, अब राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है।
📱 Pirawa Times विशेष: सीमाएं अलग, आस्था एक!
  • सांस्कृतिक सेतु: विश्वास सारंग का पिड़ावा दौरा यह साबित करता है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच केवल भौगोलिक सीमा है, लेकिन हमारी आस्था और संस्कृति एक है। सूरजकुंड मंदिर जैसे स्थलों का विकास दोनों राज्यों के भक्तों को जोड़ने का काम करेगा।
  • सूरजकुंड का महत्व: पिड़ावा का यह ऐतिहासिक मंदिर अब धीरे-धीरे बड़े राजनेताओं की दृष्टि में आ रहा है। यह पिड़ावा के विकास के लिए एक शुभ संकेत है।

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