पिड़ावा। उपखंड मुख्यालय और निकटवर्ती ग्राम धरोनिया में आवारा कुत्तों ने जो तांडव मचाया है, उसने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। मंगलवार रात से शुरू हुआ कुत्तों के हमले का सिलसिला बुधवार सुबह तक जारी रहा, जिसमें कुल 14 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। घायलों में एक 12 वर्षीय मासूम बालक भी शामिल है, जिसे कुत्ते ने नोंच लिया। एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का शिकार होना किसी बड़ी अनहोनी का संकेत दे रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी रोष और डर का माहौल है।
घटना का विवरण और घायलों की स्थिति:
जानकारी के अनुसार, कुत्तों का आतंक मंगलवार रात से ही शुरू हो गया था। अंधेरे का फायदा उठाकर आवारा कुत्तों ने राहगीरों और अपने घर के बाहर बैठे लोगों पर अचानक हमला करना शुरू कर दिया।
-
पिड़ावा शहर: यहाँ से सर्वाधिक 10 लोग कुत्तों का शिकार बने हैं। शहर के अलग-अलग मोहल्लों में कुत्तों ने लोगों के पैरों और हाथों पर गहरे जख्म कर दिए।
-
धरोनिया गाँव: पिड़ावा के पास स्थित धरोनिया गाँव में भी 4 लोग कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं।
सभी 14 घायलों को तत्काल उप जिला अस्पताल पिड़ावा ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को प्राथमिक उपचार और एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। अस्पताल में घायलों और उनके परिजनों की भीड़ का माहौल रहा।
यह भी पढ़े:- खुशियों के बीच ‘मौत का करंट’! बारात में गए गेलानी के 25 वर्षीय युवक की बिजली की चपेट में आने से मौत
12 साल का बालक बना निशाना:
हमले का सबसे दुखद पहलू एक 12 साल के बालक का घायल होना है। चश्मदीदों के मुताबिक, कुत्ता इतना आक्रामक था कि उसने बालक को नीचे गिरा दिया और उस पर लगातार हमले किए। गनीमत रही कि पास खड़े लोगों ने लाठियों से कुत्ते को भगाया, अन्यथा परिणाम और भी भयावह हो सकते थे।
क्या पागल हो गए हैं कुत्ते?
एक ही दिन में इतने सारे लोगों को काटना सामान्य बात नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि क्षेत्र में कोई एक या दो कुत्ते ‘पागल’ हो चुके हैं, जो सामने आने वाले हर व्यक्ति पर हमला कर रहे हैं। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन और पशुपालन विभाग से गुहार लगाई है कि इन आदमखोर कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए या उन्हें शहर से दूर छोड़ा जाए।
Pirawa Times विशेष: प्रशासन की नींद और जनता की जान
-
नगर पालिका की लापरवाही: क्या पिड़ावा नगर पालिका के पास आवारा पशुओं और कुत्तों को नियंत्रित करने की कोई ठोस योजना है? सड़कों पर घूमते ये झुंड अब जानलेवा साबित हो रहे हैं।
-
अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता: क्या उप जिला अस्पताल में इतनी बड़ी संख्या में आए मरीजों के लिए पर्याप्त ‘एंटी-रेबीज’ वैक्सीन उपलब्ध है? प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी गरीब मरीज को बाहर से महंगी दवा न खरीदनी पड़े।
-
तीखा सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी की जान जाने का इंतज़ार कर रहा है? 14 लोगों का घायल होना एक ‘अलार्म’ है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो बच्चों का स्कूल जाना और बुजुर्गों का टहलना दूभर हो जाएगा।
-
जनता से अपील: जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, पिड़ावा वासी रात के समय अकेले बाहर न निकलें और बच्चों का विशेष ध्यान रखें। अपने पास सुरक्षा के लिए एक डंडा जरूर रखें।







[…] […]
[…] […]
[…] […]