पिड़ावा। भारतीय नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर पिड़ावा क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र सूरजकुंड महादेव मंदिर में विभिन्न धार्मिक और सेवा कार्यों का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर (एसडीएम) दिनेश कुमार मीणा ने मंदिर पहुँचकर भगवान गौरी-शंकर की विशेष पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के दौरान भक्ति के साथ-साथ जीव-दया का संकल्प भी दोहराया गया।

चार माह तक चलेगा अखंड जलाभिषेक
नव संवत्सर के स्वागत में एसडीएम दिनेश कुमार मीणा द्वारा भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में जल का कलश बांधकर आगामी चार माह तक चलने वाले अखंड जलाभिषेक का विधिवत शुभारंभ किया। मान्यता है कि गर्मी के इन महीनों में महादेव को शीतलता प्रदान करने के लिए यह अखंड जलाभिषेक किया जाता है। जल की गिरती बूंदों के बीच मंदिर परिसर शिवमय नजर आया और श्रद्धालुओं ने महादेव के जयकारों से आसमान गुंजायमान कर दिया।
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भीषण गर्मी में पक्षियों का सहारा: बांधे परिंडे
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मंदिर परिसर में सामाजिक सरोकार की मिसाल भी पेश की गई। बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए बेजुबान पक्षियों के लिए मंदिर परिसर के पेड़ों पर पानी के परिंडे बांधे गए। एसडीएम और मंदिर समिति के सदस्यों ने मिलकर पक्षियों के लिए दाने और पानी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ली। एसडीएम मीणा ने इस दौरान आमजन से भी अपील की कि वे अपने घरों के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे लगाएं ताकि गर्मी में किसी भी पक्षी की प्यास से मृत्यु न हो।
समिति के सदस्यों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में सूरजकुंड महादेव सेवा समिति का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के दौरान समिति के अध्यक्ष सुनील शर्मा, सचिव देवेंद्र गंधर्व, नितिन सोनी, विशाल गुप्ता, दीपक कारपेंटर और शुभम सेन सहित कई शिव भक्त उपस्थित रहे। समिति के सदस्यों ने बताया कि भारतीय नव वर्ष के अवसर पर हर वर्ष यहाँ विशेष आयोजन किए जाते हैं।
📱 Pirawa Times विशेष: आस्था और प्रकृति का मेल
- प्रशासनिक सहभागिता: एसडीएम दिनेश कुमार मीणा का धार्मिक और सेवा कार्यों में स्वयं आगे बढ़कर हिस्सा लेना जनता और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय का प्रतीक है।
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अखंड जलाभिषेक का महत्व: चैत्र नवरात्रि से शुरू होने वाला यह चार माह का अभिषेक न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह जल की निरंतरता और जीवन के प्रवाह को भी दर्शाता है।
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परिंदा अभियान: सेवा समिति द्वारा पक्षियों के लिए दाने-पानी की व्यवस्था करना एक सराहनीय कदम है। मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं, बल्कि समस्त जीवों के लिए शरणस्थली भी होने चाहिए।








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