रायपुर से नाथू लाल टेलर की रिपोर्ट
रायपुर। संयम, तप और त्याग की प्रतिमूर्ति पूज्य गुरुणी महासती भँवर कुँवर जी म.सा. के देवलोक गमन के समाचार से रायपुर सहित संपूर्ण जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। मंगलवार को रायपुर में आयोजित एक विशेष श्रद्धांजलि सभा में श्रद्धालुओं ने नम आँखों से अपनी प्रिय गुरुणी जी को नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
साधना की पराकाष्ठा: पाली में हुआ संथारा सहित देवलोकगमन
पूज्य गुरुणी जी ने दिनांक 24 फरवरी 2026 को प्रातः 8 बजकर 55 मिनट पर पाली (राजस्थान) में 96 वर्ष की आयु में संथारा सहित पंडित मरण द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से देह त्याग दी। उन्होंने अपने 3 मनोरथ पूर्ण कर साधना की पराकाष्ठा को स्पर्श किया। उनके देवलोक गमन को समाज ने एक आध्यात्मिक युग का अंत बताया है।
त्याग और तपस्या का स्वर्णिम सफर
गुरुणी जी का जीवन लगभग 79 वर्षों की लंबी दीक्षा पर्याय से आलोकित रहा। उनके जीवन के प्रमुख पड़ाव प्रेरणादायी हैं:
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जन्म व संस्कार: बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में जन्मी गुरुणी जी को अपने पिता श्री जेठमल जी पुगलिया एवं माता प्रेमवती जी से उच्च धार्मिक संस्कार प्राप्त हुए।
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अल्पायु में दीक्षा: मात्र 17 वर्ष की अल्प आयु में संवत् 2004 (सन् 1947) को नागौर में उन्होंने पावन दीक्षा अंगीकार की थी।






