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पिड़ावा में गर्मी का डबल अटैक: सूरज के साथ जलदाय विभाग ने भी दिखाए ‘तेवर’! बूंद-बूंद को तरसे शहरवासी

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पिड़ावा में गर्मी का डबल अटैक: सूरज के साथ जलदाय विभाग पिड़ावा ने भी दिखाए 'तेवर'
पिड़ावा में गर्मी का डबल अटैक: सूरज के साथ जलदाय विभाग पिड़ावा ने भी दिखाए 'तेवर'!
पिड़ावा। शहर में जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, वैसे-वैसे पानी की किल्लत ने विकराल रूप धारण कर लिया है। शहर में अनियमित जलापूर्ति को लेकर आमजन का धैर्य अब जवाब देने लगा है। विडंबना यह है कि भीषण गर्मी में जब लोगों को ज्यादा पानी की जरूरत है, उसी वक्त जलदाय विभाग ने अपनी व्यवस्थाएं ठप्प कर दी हैं। शहर के विभिन्न वार्डों में पिछले कई दिनों से पानी की सप्लाई का कोई निश्चित समय नहीं है, जिससे गृहणियों से लेकर व्यापारियों तक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों की बेरुखी से बढ़ा आक्रोश:

शहरवासी प्रकाश चंद जैन, रघुनंदन राठौर, सुनील शर्मा, मनोज जैन, कपिल जैन और पंडित विष्णु प्रसाद शर्मा सहित दर्जनों नागरिकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि हर वर्ष गर्मी शुरू होते ही जलदाय विभाग जानबूझकर अपनी कार्यशैली में ढिलाई बरतता है। नागरिकों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी न तो पेयजल आपूर्ति की कोई पूर्व सूचना देते हैं और न ही शिकायतों के लिए नागरिकों के फोन उठाते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब समस्या आती है, तो अधिकारी गायब हो जाते हैं, जिससे जनता में विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

कनिष्ठ अभियंता का तर्क: बिजली बनी बाधा:

जलापूर्ति बाधित होने के संबंध में जब जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JEN) विनय मालव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी सफाई में बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराया। माधव ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से लाइट की भारी समस्या चल रही है, जिसके चलते पंप सेट सुचारू रूप से नहीं चल पा रहे हैं। बिजली की इसी आंख-मिचौली के कारण पेयजल आपूर्ति का शिड्यूल बिगड़ गया है और स्टोर किए गए पानी की मात्रा कम होने से सप्लाई बाधित हो रही है।
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जनता का तीखा सवाल: कब तक चलेगा बहानों का दौर?

बून्द-बूंद को तरसे शहरवासी
बूंद-बूंद को तरसे शहरवासी
शहरवासियों का कहना है कि विभाग हमेशा बिजली कटौती या तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेता है। यदि विभाग को पता है कि गर्मी में मांग बढ़ती है, तो बैकअप और वैकल्पिक व्यवस्थाएं पहले से क्यों नहीं की गईं? कई इलाकों में तो हालत यह है कि तीन-चार दिनों में एक बार पानी मिल रहा है, वह भी बेहद कम दबाव (Low Pressure) के साथ।
Pirawa Times विशेष: प्यासा पिड़ावा और सोया हुआ प्रशासन!
  • लापरवाही की इंतहा: क्या सरकारी अधिकारियों के लिए जनता के फोन उठाना ‘प्रोटोकॉल’ के बाहर है? संवादहीनता ही सबसे बड़े जन-आक्रोश का कारण बनती है।
  • मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति: प्री-समर मेंटेनेंस के बड़े-बड़े दावे कहाँ गए? पहली गर्मी पड़ते ही पंप और बिजली की व्यवस्था क्यों लड़खड़ा गई?
  • प्राइवेट टैंकरों की चांदी: जलदाय विभाग की विफलता का सीधा फायदा निजी टैंकर माफिया उठा रहे हैं। गरीब जनता को मजबूरी में ऊंचे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है।
  • अल्टीमेटम: यदि अगले 48 घंटों में जलापूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो नागरिक जलदाय विभाग के कार्यालय का घेराव करने की रणनीति बना रहे हैं।
सौम्य म्यूजिक सेंटर पिड़ावा
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