जयपुर/श्री महावीर जी। विश्व वन्दनीय जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर, राजस्थान की पावन धरा पर स्थित दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। शुक्रवार, 27 मार्च को भगवान महावीर के जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच आठ दिवसीय विश्व प्रसिद्ध लक्खी मेले का विधिवत आगाज़ हो गया। यह मेला आगामी 3 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में जैन और जैनेतर श्रद्धालु अपनी अगाध श्रद्धा अर्पित करने पहुंचेंगे।
ध्वजारोहण के साथ मेले का भव्य आगाज़:
मेले का शुभारम्भ शुक्रवार को भट्टारक जी की नसिया में आयोजित एक भव्य पत्रकार सम्मेलन के बाद हुआ। अतिशय क्षेत्र के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल एवं मानद् मंत्री उमरावमल संघी ने बताया कि प्रबंधक नेमी कुमार पाटनी द्वारा मुख्य द्वार पर जैन ध्वज फहराकर आठ दिवसीय उत्सव की स्थापना की गई। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘महावीर भगवान की जय’ के नारों से गुंजायमान हो उठा। प्रबंधकारिणी कमेटी ने स्पष्ट किया कि मेले की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं।
सेवा और समर्पण का संगम: 30 मार्च महावीर जयंती:
सोमवार, 30 मार्च को महावीर जयंती का मुख्य समारोह आयोजित होगा। सुबह कटला प्रांगण से प्रभातफेरी और जल यात्रा निकाली जाएगी। जयंती के अवसर पर ‘परहित’ को सर्वोपरि रखते हुए स्कूलों में मोदक वितरण, अस्पतालों में मरीजों को फल और हिण्डौन जेल के कैदियों को भी फल वितरित किए जाएंगे। शाम को श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के सहयोग से दिव्यांगों को ट्राई साइकिल, कृत्रिम पैर, बैसाखी और कैलीपर्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही असहाय महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जाएगी।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की झड़ी:
मेले के दौरान प्रतिदिन कटला पूर्वी पाण्डाल में भजन संध्या, शास्त्र प्रवचन और सामूहिक आरती होगी। 30 मार्च की रात इंदौर की साधना मादावत द्वारा ‘महानाट्य’ की प्रस्तुति दी जाएगी। 31 मार्च को पर्यटन विभाग राजस्थान की ओर से ‘राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या’ का आयोजन होगा, जिसमें लोक कलाकारों द्वारा राजस्थान की मिट्टी की महक बिखेरी जाएगी। 1 अप्रैल को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन होगा, जहाँ देश के प्रख्यात कवि महावीर स्वामी के सिद्धांतों को काव्य रूप में प्रस्तुत करेंगे।
2 अप्रैल: विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा और साम्प्रदायिक सौहार्द:
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण गुरुवार, 2 अप्रैल को निकलने वाली विशाल रथयात्रा होगी। दोपहर 2:30 बजे मुख्य मंदिर के कटला परिसर से भगवान महावीर की मनोज्ञ प्रतिमा स्वर्ण जड़ित रथ में विराजमान होकर निकलेगी। इस यात्रा की विशेषता यह है कि इसमें जैन, मीणा, गुर्जर सहित सभी जातियों के ग्रामीण श्रद्धालु कंधा से कंधा मिलाकर शामिल होते हैं, जो भारत की साम्प्रदायिक एकता का बेमिसाल उदाहरण है। रथयात्रा गंभीर नदी के तट पर पहुंचेगी, जहाँ भगवान का अभिषेक किया जाएगा। विशेष बात यह है कि रथयात्रा के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर पाचना बांध से गंभीर नदी में पानी छोड़ दिया गया है।
अतिशय क्षेत्र की महत्ता:
श्री महावीर जी को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम’ के अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। यहाँ की प्राचीन सैंड स्टोन से निर्मित प्रतिमा और गगनचुम्बी धवल शिखर भक्तों को सम्यक दर्शन और ज्ञान का संदेश देते हैं।
Pirawa Times विशेष: आस्था का केंद्र और प्रशासन की परीक्षा
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साम्प्रदायिक एकता का सन्देश: ऐसे समय में जब समाज में दूरियां बढ़ रही हैं, महावीर जी का मेला यह साबित करता है कि आस्था किसी एक वर्ग की जागीर नहीं है। मीणा और गुर्जर समाज का इस जैन मेले में जुड़ाव हमारी साझा संस्कृति की ताकत है।
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सेवा ही धर्म है: केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि दिव्यांगों को सहायता और कैदियों को फल वितरण जैसे कार्य यह बताते हैं कि जैन धर्म का मूल ‘करुणा’ है। ‘जीओ और जीने दो’ का नारा आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो जाता है।
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प्रशासनिक जिम्मेदारी: लाखों की भीड़ को नियंत्रित करना और नदी में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। पाचना बांध से पानी छोड़ना एक सराहनीय कदम है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नदी तट पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
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रोजगार का सृजन: यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि हजारों स्थानीय लोगों के लिए साल भर के रोजगार का आधार भी है। इसे और अधिक व्यवस्थित कर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर बड़ी जगह दिलाई जा सकती है।

महावीर मार्ग (पट्टी बाज़ार ) पिड़ावा






