रायपुर। रायपुर तहसील में पिछले दो-तीन दिनों से जारी बेमौसम बारिश ने किसानों की साल भर की गाढ़ी कमाई पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार खड़ी और काटकर रखी गई फसलें अब कीचड़ और पानी में सड़ने की कगार पर हैं। विशेष रूप से गेहूं, कलौंजी, अलसी, चिया और लहसुन की फसलों को इस बेवक्त की बरसात ने सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। फसलों के भीगने से न केवल दाने का रंग खराब हुआ है, बल्कि उनकी गुणवत्ता (क्वालिटी) गिरने से बाजार में सही दाम न मिलने की चिंता ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
किसान संघ ने उठाई मुआवजे की आवाज:
भारतीय किसान संघ के संभाग सहमंत्री मुकेश मेहर, ने इस प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि रायपुर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में फसलें कटी पड़ी थीं, जो अचानक आई बारिश में पूरी तरह भीग गई हैं। मेहर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “फसलों की चमक खोने से मंडियों में किसानों को पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पाएगा। ऐसे में शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी एयर-कंडीशनर वाली फाइलों से बाहर निकलें और खेतों में जाकर वास्तविक नुकसान का आकलन करें। हमारी मांग है कि शीघ्र ही विशेष गिरदावरी करवाकर पीड़ित किसानों को उचित राहत पैकेज प्रदान किया जाए।”

फतेहगढ़ से परासली तक बर्बादी का मंजर:
रायपुर क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से आ रही तस्वीरें बेहद डराने वाली हैं। फतेहगढ़ निवासी किसान द्वारिका लाल ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि “खेत में लहसुन की फसल निकाल कर सुखाने के लिए रखी थी, लेकिन पानी में डूबने से कंद की गुणवत्ता खराब हो गई है। अब भीगी हुई फसल को सुखाने के लिए बार-बार पलटा (Side change) लगाने में भारी परेशानी हो रही है और सड़ने का डर सता रहा है।”
वहीं, परासली निवासी किसान रामचंद्र की आंखों में नमी साफ देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि “लगातार दो दिनों की बारिश से गेहूं की फसल पूरी तरह भीग गई है। गेहूं का दाना काला पड़ने लगा है और उसकी चमक फीकी पड़ गई है। अब इसे कोई व्यापारी उचित दाम पर नहीं खरीदेगा। हमारी लागत निकलना भी अब मुश्किल लग रहा है।” भारतीय किसान संघ के जिला प्रचार प्रमुख महेश मेहर, सुवास किसान मांगी लाल गुर्जर ने भी चिंता जताई है।
किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें:
रायपुर तहसील का किसान पहले ही बढ़ती लागत और खाद-बीज की मार झेल रहा था, अब कुदरत के इस ‘सर्जीकल स्ट्राइक’ ने उसे कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। अलसी और चिया जैसी नकदी फसलों के बर्बाद होने से क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। प्रशासन की ओर से अब तक सर्वे की कोई ठोस सुगबुगाहट न होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
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