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संयम का जीवन में बड़ा महत्व – मुनि गणधर विवर्धन सागर, विश्वनायक सागर

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संयम का जीवन में बड़ा महत्व – मुनि गणधर विवर्धन सागर, विश्वनायक सागर
संयम का जीवन में बड़ा महत्व – मुनि गणधर विवर्धन सागर, विश्वनायक सागर
पिड़ावा। नगर स्थित श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर में मुनि गणधर विवर्धन सागर महाराज, प्रवर्तक विश्वनायक सागर महाराज ससंघ पंच पिच्छीका मुनिराज विराजमान हैं। उनके सान्निध्य में नगर में ग्रीष्मकालीन धर्म देशना का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन बड़े मंदिर परिसर में मुनिराजों के प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो रहे हैं।

समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि रविवार को आयोजित धर्मसभा में मुनि गणधर विवर्धन सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पंचम काल में मनुष्य जीवन मिलना अत्यंत दुर्लभ है। इसलिए मनुष्य को सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र के माध्यम से अपने जीवन को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करना चाहिए।
वहीं प्रवर्तक विश्वनायक सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में संयम का अत्यंत महत्व है। जैन धर्म में संयम का अर्थ अपनी इंद्रियों, मन और वाणी पर नियंत्रण रखते हुए आत्मिक शुद्धि प्राप्त करना है। संयम का पालन करने से अहिंसा का मार्ग मजबूत होता है, कर्मों के प्रवाह को रोका जा सकता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। उन्होंने बताया कि संयम के विभिन्न स्वरूप मनुष्य को सांसारिक सुखों से विरक्ति दिलाकर स्थायी और आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति की ओर प्रेरित करते हैं।
मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। सुबह 10 बजे आहार चर्या, दोपहर 3 बजे स्वाध्याय, शाम को गुरु भक्ति तथा रात्रि 8:30 बजे वैयावृति और भक्तामर पाठ का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।
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