रायपुर। झालावाड़ जिले के जंगलों और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर उतर आया है। उप वन संरक्षक (DCF) सागर पंवार के कड़े तेवरों के बाद जिले के रायपुर और पिड़ावा क्षेत्र में अवैध लकड़ी के कारोबार पर वज्रपात हुआ है। शनिवार को वन विभाग की एक विशेष टास्क फोर्स ने रायपुर क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से छापेमारी करते हुए 3 अवैध आरा मशीनों को उखाड़ फेंका और भारी मात्रा में अवैध लकड़ी का जखीरा ज़ब्त किया है। इस कार्रवाई ने क्षेत्र के लकड़ी माफियाओं की कमर तोड़ दी है और अवैध संचालकों में हड़कंप मच गया है।

रणनीति और औचक दबिश:
DCF सागर पंवार के निर्देशन में पिछले कुछ दिनों से रायपुर क्षेत्र में अवैध आरा मशीनों के संचालन की गोपनीय सूचनाएं संकलित की जा रही थीं। मिशन के प्रथम चरण के तहत, क्षेत्रीय वन अधिकारी (RO), पिड़ावा के नेतृत्व में एक जांबाज टीम का गठन किया गया। टीम ने शनिवार तड़के रायपुर क्षेत्र के संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ औचक दबिश दी। वन विभाग की गाड़ियाँ देखते ही मशीनों पर काम कर रहे लोग भागने लगे, लेकिन टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी कर ली।
कार्रवाई का लेखा-जोखा:
- अवैध मशीनों का नेटवर्क ध्वस्त: मौके पर बिना किसी वैध लाइसेंस या दस्तावेज़ के धड़ल्ले से चल रही 3 आरा मशीनों को विभाग ने अपने कब्ज़े में ले लिया। इन मशीनों के मालिकों के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
-
लावारिस उपकरणों की जब्ती: एक अन्य गुप्त स्थान पर दबिश के दौरान टीम को लावारिस हालत में आरा मशीन और उसे चलाने का शक्तिशाली इंजन मिला। वन विभाग ने न केवल मशीन, बल्कि उसे चलाने वाले सभी तकनीकी उपकरणों को भी ज़ब्त कर लिया है।
-
लकड़ी का विशाल भंडार: छापेमारी के दौरान वन विभाग को कीमती लकड़ी का बड़ा स्टॉक मिला, जिसे अवैध कटान के जरिए जमा किया गया था। ज़ब्त की गई सभी मशीनों और लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय, पिड़ावा के सुरक्षित डिपो में पहुँचाया गया है।
DCF सागर पंवार की दो टूक चेतावनी:
उप वन संरक्षक सागर पंवार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यह तो बस ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। उन्होंने कहा, “हमने अवैध लकड़ी कारोबार की जड़ें खोदने के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया है। ज़िले के हर कोने में इसी तरह की छापामार कार्रवाई जारी रहेगी। पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”
यह भी पढ़े:-NH-552G हाईवे के लिए बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण, सैकड़ों खातेदार प्रभावित — 21 दिन में आपत्ति का मौका
लगातार तीसरी बड़ी स्ट्राइक:
गौर करने वाली बात यह है कि रायपुर और पिड़ावा बेल्ट में वन विभाग की यह पिछले कुछ समय में तीसरी सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले की गई रेड में लगभग डेढ़ दर्जन (18) अवैध मशीनें पकड़ी जा चुकी हैं, जिनके मामले फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन हैं। विभाग की इस सक्रियता ने साबित कर दिया है कि अब लकड़ी माफियाओं के ‘अच्छे दिन’ खत्म हो चुके हैं।
Pirawa Times विशेष: खाकी और कुल्हाड़ी की जंग?
- लाइसेंस राज या माफिया राज? रायपुर क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में अवैध मशीनों का संचालन बिना स्थानीय मिलीभगत के संभव नहीं है। क्या विभाग उन ‘सफ़ेदपोश’ लोगों तक भी पहुँचेगा जो इन माफियाओं को संरक्षण देते हैं?
-
पर्यावरण का कत्लेआम: एक आरा मशीन रोज़ाना दर्जनों पेड़ों की बलि लेती है। वन विभाग की यह देरी से ही सही, लेकिन दुरुस्त कार्रवाई झालावाड़ के ‘ग्रीन कवर’ को बचाने के लिए संजीवनी साबित होगी।
-
जनता की भागीदारी: विभाग ने पहली बार आमजन से अपील की है। क्या जनता बिना डरे इन रसूखदार माफियाओं की सूचना विभाग को देगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
-
न्यायिक प्रक्रिया: पकड़ी गई मशीनों का क्या होता है? क्या वे फिर से सेटिंग करके बाहर आ जाती हैं या उन्हें नष्ट किया जाता है? पिड़ावा टाइम्स की नज़र इस न्यायिक प्रक्रिया पर बनी रहेगी।

Near SBI Bank Pirawa







[…] […]