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गेहूं की फसल को ‘अंतिम पानी’ पिलाने का दौर: बेहतर पैदावार की उम्मीद में जुटे अन्नदाता

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गेहूं की फसल को 'अंतिम पानी' पिलाने का दौर
बेहतर पैदावार की उम्मीद में जुटे अन्नदाता
रायपुर। (नाथू लाल टेलर)  जिले में इस वर्ष गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है। अनुकूल मौसम और पर्याप्त संसाधनों के बीच अब फसल अपने अंतिम चरण में है। जिले के किसान इन दिनों गेहूं की फसल को अंतिम सिंचाई (पानी) देने में पूरी मेहनत से जुटे हुए हैं।

5 से 6 बार सिंचाई है आवश्यक

​विशेषज्ञों और कृषि जानकारों के अनुसार, गेहूं की भरपूर पैदावार प्राप्त करने के लिए फसल चक्र के दौरान कम से कम 5 से 6 बार सिंचाई करना अनिवार्य होता है। इसी क्रम का पालन करते हुए झालावाड़ के किसान अब अंतिम दौर का पानी पिला रहे हैं, ताकि दानों का भराव और गुणवत्ता श्रेष्ठ रहे।

खेतों में सुबह से शाम तक मरुधरा के लाल सक्रिय

​रायपुर तहसील क्षेत्र के खेजरपुर सहित जिले के विभिन्न गांवों में किसान सुबह से शाम तक खेतों में पसीना बहा रहे हैं। सिंचाई के साथ-साथ मेड़ सुधार, पानी के समुचित प्रवाह को सुनिश्चित करना और फसल की सुरक्षा जैसे कार्यों में निरंतर सक्रियता देखी जा रही है।

बेहतर उत्पादन की प्रबल संभावना

भारतीय किसान संघ के जिला प्रचार प्रमुख महेश मेहर ने बताया कि इस वर्ष झालावाड़ में गेहूं की बुवाई अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र में की गई है। उन्होंने कहा कि अधिकांश क्षेत्रों में फसल वर्तमान में बहुत अच्छी अवस्था में है। यदि आगामी कुछ दिनों तक मौसम इसी प्रकार अनुकूल बना रहा, तो निश्चित रूप से इस वर्ष गेहूं का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रहने की संभावना है।

📱 पिड़ावा टाइम्स विशेष: किसानों के लिए परामर्श

  • सिंचाई का समय: अंतिम सिंचाई के दौरान हवा की गति का ध्यान रखें, ताकि फसल गिरने (Lodging) का खतरा न रहे।
  • निगरानी: फसल के पकने के समय कीटों या किसी भी प्रकार के रोग के लक्षणों पर पैनी नजर रखें।
  • मौसम अपडेट: कटाई से पहले मौसम विभाग की चेतावनियों का नियमित अवलोकन करते रहें।

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