पिड़ावा। अहिंसा के अवतार और जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव आज पिड़ावा नगर में सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वाधान में अपार हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। यह अवसर दुगनी खुशी का रहा, क्योंकि आज ही के दिन आचार्य विशुद्ध सागर महाराज का ‘आचार्य पदारोहण दिवस’ भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। परम पूज्य 108 गणधर श्री विवर्धन सागर महाराज एवं विश्वनायक सागर मुनि महाराज (पाँच पिच्छिका) ससंघ के पावन सानिध्य ने इस उत्सव को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
प्रभात फेरी और भक्ति का आगाज़:
उत्सव की शुरुआत अलसुबह ब्रम्हानन्द सागर पाठशाला एवं वीतराग विज्ञान पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा निकाली गई प्रभात फेरी से हुई। हाथों में केसरिया ध्वज लिए बच्चे भगवान महावीर के जयकारे लगा रहे थे। समाज के प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि प्रभात फेरी में बड़ी संख्या में पुरुष वर्ग और महिला मण्डल के सदस्य भजन गाते हुए चल रहे थे। फेरी के समापन पर शेलेश उपहार परिवार की ओर से श्रद्धालुओं को प्रभावना वितरित की गई।
अभिषेक, शांतिधारा और आचार्य वंदना:
प्रभात फेरी के पश्चात बड़े मन्दिर में मुनिराजों के सानिध्य में भगवान का भव्य अभिषेक एवं विश्व शांति की कामना के साथ शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने नित्य नियम पूजन के साथ भगवान महावीर स्वामी और आचार्य विराग सागर व विशुद्ध सागर महाराज की संगीतमय पूजा की। इस दौरान विश्वनायक सागर महाराज ने आचार्य विशुद्ध सागर जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में जो दिगम्बर संत परंपरा हम देख रहे हैं, वह उनके द्वारा बताए गए मोक्ष मार्ग का ही जीवंत स्वरूप है।
पालकी यात्रा और भव्य शोभायात्रा:
दोपहर में नगर के मुख्य मार्गों से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। भगवान महावीर स्वामी को कलात्मक पालकी में विराजमान कर नवयुवक मण्डल के सदस्य अपने कंधों पर उठाकर चल रहे थे। शोभायात्रा में सजी बग्गी और झांकियों के माध्यम से ‘जियो और जीने दो’ का वैश्विक संदेश प्रसारित किया गया। श्री साँवलिया पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र (बड़ा मन्दिर) से शुरू हुई यह यात्रा पिपली चौक, शहर मोहल्ला, सेठान मोहल्ला, खांण्डुपुरा और नयापुरा होते हुए पुनः मन्दिर पहुँची। शोभायात्रा में राजनंदिनी, परिणति, संजना, इशिका, साक्षी, श्रुति, मीनू और शिवानी जैन मंगल कलश धारण कर चल रही थीं।

मुनि श्री का संदेश: “मैत्री भाव ही धर्म है”
शोभायात्रा के समापन पर मुनि 108 श्री विवर्धन सागर महाराज ने मंगल प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि महावीर का संदेश केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि एक इन्द्री से लेकर पंच इन्द्री तक के सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखने का है। संसार के दुखों से मुक्ति का एकमात्र मार्ग आत्म-कल्याण और अहिंसा है। प्रवचनों के बाद भगवान का पुनः अभिषेक हुआ और मांगलिक भवन में आयोजित वात्सल्य भोज में सकल समाज एवं आगंतुक अतिथियों ने शिरकत की।
प्रतिभाओं का सम्मान और सांस्कृतिक संध्या:
रात्रि में खांण्डुपुरा स्थित जैन धर्मशाला कटला में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस दौरान समाज के उन होनहार छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया, जिन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। मेधावी छात्र-छात्राओं को समाज की ओर से प्रशस्ति पत्र एवं न्यामत चन्द जैन, अर्हम जैन (सुविधि परिवार, झालावाड़) की ओर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन अनिल उपहार द्वारा किया गया।
Pirawa Times विशेष: संस्कार, शिक्षा और समर्पण
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नवाचार और सम्मान: समाज द्वारा मेधावी बच्चों को सम्मानित करना एक सराहनीय कदम है। यह न केवल बच्चों का हौसला बढ़ाता है, बल्कि समाज के भविष्य को शिक्षा के प्रति जागरूक भी करता है।
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अहिंसा का जीवंत संदेश: पिड़ावा की गलियों में निकली पालकी यात्रा ने यह याद दिलाया कि महावीर के सिद्धांत आज के युद्धग्रस्त विश्व के लिए सबसे बड़ी औषधि हैं।
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संगठन की शक्ति: पाठशाला के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सक्रिय भागीदारी दर्शाती है कि पिड़ावा जैन समाज अपने संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में सफल रहा है।
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सांस्कृतिक धरोहर: बड़ा मन्दिर और खांण्डुपुरा मन्दिर के माध्यम से होने वाले ये आयोजन नगर की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक समृद्ध करते हैं।

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