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पिड़ावा में भक्ति का महासंगम: 20 वर्षों बाद संपन्न हुआ ऐतिहासिक ‘सिद्ध चक्र महामण्डल विधान

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पिड़ावा में भक्ति का महासंगम: 20 वर्षों बाद संपन्न हुआ ऐतिहासिक 'सिद्ध चक्र महामण्डल विधान
सिद्ध चक्र महामण्डल विधान के समापन पर निकाली गई शोभायात्रा
पिड़ावा। नगर के आध्यात्मिक इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वाधान और महिला मण्डल के विशेष सहयोग से आयोजित जैन धर्म का सबसे बड़ा अनुष्ठान ‘सिद्ध चक्र महामण्डल विधान’ रविवार को विश्व शांति महायज्ञ और एक विशाल शोभायात्रा के साथ सानन्द संपन्न हुआ। खंडूपुरा स्थित पार्श्वनाथ जिनालय (नया मन्दिर) में यह भव्य आयोजन पूरे 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित किया गया था। जिसे लेकर श्रावकों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया।

मुनिराजों का सानिध्य और भक्ति की पराकाष्ठा:

यह विधान परम पूज्य 108 गणधर श्री विवर्धन सागर जी महाराज एवं प्रवर्तक विश्वनायक सागर (पाँच पिच्छिका) मुनिराज के पावन सानिध्य में 22 मार्च से शुरू हुआ था। जैन समाज के प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि पंडित राजकुमार के कुशल निर्देशन में आठ दिनों तक भक्ति की सरिता बही। संगीत की मधुर धुनों के बीच अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन और सिद्ध चक्र महामण्डल विधान की विशेष आराधना की गई। शनिवार को विधान के चर्मोत्कर्ष पर भगवान को 1024 अर्घ्य समर्पित किए गए, जो अपने आप में एक भक्तिमयी कीर्तिमान रहा।
पिड़ावा में भक्ति का महासंगम: 20 वर्षों बाद संपन्न हुआ ऐतिहासिक 'सिद्ध चक्र महामण्डल विधान
पिड़ावा में भक्ति का महासंगम: 20 वर्षों बाद संपन्न हुआ ऐतिहासिक ‘सिद्ध चक्र महामण्डल विधान

केसरिया और सफेद रंग में रंगा पिड़ावा:

रविवार सुबह 8:30 बजे विश्व शांति महायज्ञ की पूर्णता के बाद मन्दिर परिसर से एक भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। इस शोभायात्रा का दृश्य अलौकिक था; जहाँ पुरुष वर्ग धवल सफेद वस्त्रों में जैन ध्वज थामे चल रहे थे, वहीं महिला मण्डल की सदस्य और श्राविकाएं केसरिया साड़ियों में मंगल कलश धारण किए हुए थीं। इंद्रगण ‘माँ जिनवाणी’ को ससम्मान मस्तक पर धारण कर चल रहे थे। शोभायात्रा नयापुरा, खंडूपुरा, पिपली चौक, शहर मोहल्ला और सेठान मोहल्ला जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहाँ जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पाद-प्रक्षालन और आरती उतारकर अगवानी की।

पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य:

शोभायात्रा पुनः पार्श्वनाथ नया मन्दिर पहुँची, जहाँ मुनि गणधर 108 विवर्धन सागर महाराज ससंघ के पाद प्रक्षालन का परम सौभाग्य दिनेश जैन सेक्रेटरी एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं, ज्ञान की सरिता को प्रवाहित करने हेतु शास्त्र भेंट करने का पुण्य राजेंद्र जैन खंडूपुरा और रमेश जैन लुहाड़िया (सुसनेर) को मिला।
सिद्ध चक्र महामण्डल विधान
मुनि श्री विवर्धन सागर महाराज ओजस्वी प्रवचन देते हुए

मुनि श्री का मंगल प्रवचन: “आत्मा की शुद्धि का सूत्र है सिद्ध चक्र”

इस अवसर पर मुनि श्री विवर्धन सागर महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि पिड़ावा के भक्तों की अनन्य भक्ति दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। उन्होंने सिद्ध चक्र विधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें नौ पदों और नौ तत्वों की मंडलाकार रूप में आराधना की जाती है। यह विधान आत्मा की शुद्धि, आंतरिक शांति और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके नियमित अनुष्ठान से ज्ञात-अज्ञात पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

वात्सल्य भोज और आभार:

धार्मिक क्रियाओं के पश्चात खांण्डुपुरा स्थित जैन धर्मशाला कटला में सकल दिगम्बर जैन समाज और बाहर से पधारे अतिथियों के लिए वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंत में विधान प्रभारी सचिन जैन ने सभी कार्यकर्ताओं, समाजजनों और प्रशासनिक सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
Pirawa Times विशेष: 20 साल का इंतजार और भक्ति का प्रतिफल
  • इतिहास की पुनरावृत्ति: 20 वर्षों बाद खांण्डुपुरा मन्दिर में इस विधान का होना यह दर्शाता है कि पिड़ावा की जैन समाज अपनी जड़ों और परंपराओं के प्रति कितनी सजग है।
  • मुनि श्री का सानिध्य: गणधर विवर्धन सागर जी जैसे तपस्वी मुनिराज का प्रवास नगर के लिए सौभाग्य का प्रतीक है, जिससे न केवल जैन समाज बल्कि सर्व समाज को आध्यात्मिक लाभ मिला है।
  • अनुशासन की मिसाल: शोभायात्रा के दौरान समाज का अनुशासन और एक ही रंग के परिधानों में एकता का प्रदर्शन नगर के लिए प्रेरणादायी रहा।
  • शांति का संदेश: ‘विश्व शांति महायज्ञ’ के माध्यम से जैन समाज ने जियो और जीने दो के साथ समस्त विश्व के कल्याण की भावना को सर्वोपरि रखा है।
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