पिड़ावा। नगर आज मेघवाल समाज की एकता और गौरवशाली परंपरा का गवाह बना। अवसर था मेघवाल समाज आदर्श सामूहिक विवाह सम्मेलन का, जो पूरे 23 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आयोजित किया गया। इस भव्य आयोजन में न केवल 17 जोड़े विवाह के अटूट बंधन में बंधे, बल्कि समाज ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों और महापुरुषों के प्रति अगाध श्रद्धा का भी प्रदर्शन किया।

जुलूस में गूँजा महापुरुषों का नाम:
कार्यक्रम का शुभारंभ दूल्हा-दुल्हन के परिवारों द्वारा रस्मों-रिवाज के साथ हुआ। इसके पश्चात, भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में नगर में एक विशाल जुलूस निकाला गया। फूलों से सजी बग्गियों में सवार नवयुगल और हाथों में नीले ध्वज लिए समाज के युवा, बुजुर्ग व महिलाएं बाबा साहब के जयघोष कर रहे थे। जुलूस जिस भी मार्ग से गुजरा, वहां सर्वसमाज द्वारा मेघवाल समाज का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जो नगर के आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा था।
पद्मनाभ परिसर में जुटे हजारों लोग:
नगर भ्रमण के पश्चात भव्य शोभायात्रा पद्मनाभ परिसर पहुँची। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक कालूराम मेघवाल एवं पूर्व विधायक मदनलाल रहे। अतिथियों का समाज के पदाधिकारियों द्वारा माल्यार्पण कर और साफा पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन न केवल फिजूलखर्ची पर लगाम लगाते हैं, बल्कि समाज में समरसता और एकजुटता का संचार भी करते हैं।
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गायत्री परिवार के सानिध्य में पाणिग्रहण संस्कार:
भोजन प्रसादी के पश्चात मुख्य समारोह प्रारंभ हुआ। गायत्री परिवार के विद्वान पंडितों के सानिध्य में पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 17 जोड़ों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया गया। एक साथ एक ही मंडप के नीचे अग्नि को साक्षी मानकर इन नवयुगलों ने सात फेरे लिए और गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया।
इनका रहा विशेष सहयोग:
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सम्मेलन अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण, रतनलाल, रमेश चंद, भगवान लाल और दिनेश कुमार वर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई। साथ ही रामबाबू, गोपाल, फूलचंद, मांगीलाल, प्रभुलाल, नारायणलाल, चंदरलाल, दयाराम, प्रेमचंद, शिवलाल, मुकेश, कैलाश, बीरम, रामसिंह, कमलेश, बाबूलाल, मनीष और देवी लाल सहित मेघवाल समाज के हजारों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर इस 23 साल बाद हुए आयोजन को यादगार बना दिया।
Pirawa Times विशेष: 23 साल का सूखा खत्म, सामाजिक क्रांति की शुरुआत!
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इतिहास की पुनरावृत्ति: पिड़ावा में 23 साल पहले मेघवाल समाज का सामूहिक सम्मेलन हुआ था। आज का सफल आयोजन दर्शाता है कि समाज की नई पीढ़ी अपनी परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए कितनी संकल्पित है।
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महापुरुषों का सम्मान: विवाह के साथ-साथ बाबा साहब और ज्योतिबा फुले की जयंती मनाना एक प्रगतिशील कदम है। यह संदेश देता है कि खुशियों के मौके पर अपने मार्गदर्शकों को याद रखना ही असली संस्कार है।
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सर्वसमाज का स्वागत: सांडों के आतंक और बिजली जैसी समस्याओं से जूझते शहर में जब पूरा समाज मिलकर किसी जुलूस का स्वागत करता है, तो यह पिड़ावा की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूती देता है।
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आर्थिक बचत: एक साथ 17 शादियों के आयोजन से न केवल मध्यमवर्गीय परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ, बल्कि समाज में सादगी का संदेश भी गया।

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