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चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल—क्या पानी खत्म होने के बाद शुरू होगा अवैध खनन?

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चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल
चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल—क्या पानी खत्म होने के बाद शुरू होगा अवैध खनन?

खेजड़िया रोड स्थित एनीकट में पानी रोकने की व्यवस्था पर सवाल, पिछले साल भी रही थी ऐसी स्थिति; जल संरक्षण के साथ नदी की सुरक्षा भी चुनौती

पिड़ावा। मानसून का दौर समाप्त होने के बाद पिड़ावा के खेजड़िया रोड स्थित चवली नदी के एनीकट में जमा पानी को संरक्षित करने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एनीकट में पानी मौजूद होने के बावजूद यदि समय रहते गेट नहीं लगाए गए और पानी लगातार बहता रहा तो आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर तेजी से कम हो सकता है।
मामला केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है। पानी कम होने के बाद चवली नदी का नदी क्षेत्र खुलने पर वहां अवैध खनन की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में एनीकट में पानी रोकने की व्यवस्था नहीं होना नदी के पर्यावरण और जल संरक्षण के साथ-साथ अवैध खनन की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

26 मार्च 2026 का यह फोटो जो चवली नदी में हुए अवैध खनन की गवाही देता हुआ।
26 मार्च 2026 का यह फोटो जो चवली नदी में हुए अवैध खनन की गवाही देता हुआ।

पानी रहेगा तो खनन पर भी रहेगी नजर

चवली नदी में पानी रहने से नदी का क्षेत्र जलमग्न रहता है। जैसे-जैसे पानी कम होगा, नदी का बड़ा हिस्सा खुलता जाएगा। ऐसे में यदि प्रशासन की प्रभावी निगरानी नहीं रही तो नदी क्षेत्र में अवैध रूप से खनन शुरू होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि अगर एनीकट में पानी रोकने की व्यवस्था नहीं की गई तो क्या आने वाले समय में नदी का पानी खत्म होने के साथ ही अवैध खनन करने वालों के लिए रास्ता आसान नहीं हो जाएगा?

पिछले साल भी नहीं लगाए गए थे गेट

स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष भी मानसून समाप्त होने के बाद एनीकट में गेट नहीं लगाए गए थे। अब इस बार भी यदि स्थिति ऐसी ही रहती है तो लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बारिश के पानी को रोककर रखने की व्यवस्था आखिर क्यों नहीं की जा रही है।
एक तरफ शहर और आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए जल संरक्षण की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ नदी में पानी कम होने के बाद नदी क्षेत्र की सुरक्षा भी प्रशासन के सामने चुनौती होगी।

नगर पालिका और संबंधित विभाग से जवाब जरूरी

एनीकट के गेट लगाने और उनके संचालन की जिम्मेदारी किस विभाग की है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि जिम्मेदारी नगर पालिका की है तो नगर पालिका को यह बताना चाहिए कि गेट कब लगाए जाएंगे और एनीकट के पानी को संरक्षित करने के लिए क्या योजना है।
साथ ही प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि चवली नदी में पानी कम होने के बाद अवैध खनन रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई की क्या व्यवस्था रहेगी।

अब दो सवाल, जवाब एक ही व्यवस्था से

चवली नदी के एनीकट को लेकर अब दो महत्वपूर्ण सवाल सामने हैं—

पहला: क्या बारिश के बाद उपलब्ध पानी को एनीकट में रोककर भूजल संरक्षण किया जाएगा?

दूसरा: पानी कम होने के बाद चवली नदी में संभावित अवैध खनन को रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा?

शहरवासियों की नजर अब जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई पर है। यदि समय रहते पानी को संरक्षित करने और नदी क्षेत्र की निगरानी की व्यवस्था कर दी जाती है तो इससे जल संरक्षण के साथ नदी की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकती है। लेकिन यदि एनीकट का पानी यूं ही बहता रहा, तो आने वाले समय में जलस्तर और संभावित अवैध खनन—दोनों मुद्दे गंभीर रूप ले सकते हैं।

सवाल यही है—एनीकट के गेट कब लगेंगे और चवली नदी की निगरानी कौन करेगा?

 

मैं अभी झालावाड़ मीटिंग में आ गया था। मैं कल नगर पालिका आते ही इस मामले को दिखाता हूं। एनीकट पर गेट लगाने की कार्रवाई करते हैं।

मनीष मीणा 

नगर पालिका अधिशासी अधिकारी

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