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सफेद हाथी साबित हुई पिड़ावा की नवीन सब्जी मंडी: 50 लाख की लागत पर नगर पालिका ने फेरा पानी, अपराधियों का बना अड्डा

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सफेद हाथी साबित हुई पिड़ावा की नवीन सब्जी मंडी
50 लाख की लागत पर नगर पालिका ने फेरा पानी, अपराधियों का बना अड्डा
पिड़ावा। नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता के चलते सरकार के 50 लाख रुपये मिट्टी में मिलते नजर आ रहे हैं। चंवली नदी के तट पर बनाई गई नवीन सब्जी मंडी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। आलम यह है कि जिस परिसर में सब्जी विक्रेताओं की चहल-पहल होनी चाहिए थी, वहां आज धूल और असामाजिक तत्वों का साम्राज्य है।

​प्रशासनिक विफलता: आवंटन के बाद भी सूनी पड़ी मंडी

​नगर पालिका की लापरवाही का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि 28 दिसंबर 2022 को दुकानों की लॉटरी निकाली गई और 1 जनवरी 2023 से विक्रेताओं को वहां बैठने के सख्त निर्देश दिए गए थे। तत्कालीन एसडीएम अभिषेक चारण की सख्ती के चलते कुछ दिन तो मंडी संचालित हुई, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद नगर पालिका ने सुध लेना छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि सब्जी विक्रेता फिर से सड़कों पर काबिज हो गए और 50 लाख की मंडी वीरान हो गई।
सफेद हाथी साबित हुई पिड़ावा की नवीन सब्जी मंडी: 50 लाख की लागत पर नगर पालिका ने फेरा पानी, अपराधियों का बना अड्डा
अपराधियों का बना अड्डा
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शौचालय और नशेड़ियों का सुरक्षित ठिकाना

​देखरेख के अभाव में यह नवीन परिसर अब अपराधियों और असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित शरण स्थली बन चुका है।​

  • नशे का कारोबार: स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के अंधेरे में यहाँ स्मैकचियों और गांजा पीने वालों का जमघट लगा रहता है।
  • ​गंदगी का अंबार: उचित प्रबंधन न होने से लोग इस परिसर को सार्वजनिक शौचालय के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे चारों ओर दुर्गंध और गंदगी फैली हुई है।
  • ​लाखों की बर्बादी: खिड़की, दरवाजे और दीवारों की हालत दिन-प्रतिदिन जर्जर हो रही है, जिसे देखकर साफ़ लगता है कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी में बहा दिया गया है।

    सफेद हाथी साबित हुई पिड़ावा की नवीन सब्जी मंडी: 50 लाख की लागत पर नगर पालिका ने फेरा पानी, अपराधियों का बना अड्डा
    नशेड़ियों का सुरक्षित ठिकाना

अज्ञात लोगों ने बनाया निवास: सुरक्षा पर गंभीर सवाल

​शहर में इन दिनों यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है कि नवीन सब्जी मंडी परिसर में कुछ अज्ञात लोगों ने अपना निवास गृह (डेरा) बना लिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नवनिर्मित दुकानों और परिसर में बाहरी और अज्ञात लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। नगर पालिका को इस बारे में कई बार सूचित किया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से लगातार की जा रही अनदेखी ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आखिर ये अज्ञात लोग कौन हैं और सरकारी संपत्ति पर इन्हें रहने की अनुमति किसने दी, यह जाँच का विषय है।

सफेद हाथी साबित हुई पिड़ावा की नवीन सब्जी मंडी: 50 लाख की लागत पर नगर पालिका ने फेरा पानी, अपराधियों का बना अड्डा

​जिम्मेदारों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: अधिकारी झाड़ रहे पल्ला

​मंडी के संचालन को लेकर जब जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उनकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं:
  • ​कनिष्ठ अभियंता का पक्ष: नगर पालिका के कनिष्ठ अभियंता ने बताया कि कई बार सब्जी विक्रेताओं को वहां शिफ्ट करने के प्रयास किए गए, लेकिन कई कारणों से वे असफल रहे। उन्होंने अधिक जानकारी के लिए अधिशासी अधिकारी से बात करने की सलाह दी।
  • ​अधिशासी अधिकारी मौन: जब इस संबंध में अधिशासी अधिकारी मनीष मीणा से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
​अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इस रुख से साफ़ लग रहा है कि न तो प्रशासन और न ही कोई नेता चाहता है कि यह नवीन सब्जी मंडी संचालित हो।

​सड़कों पर जाम, राहगीर परेशान

​एक ओर जहाँ 50 लाख की मंडी धूल खा रही है, वहीं दूसरी ओर सब्जी विक्रेता शहर के मुख्य मार्गों और बस स्टैंड रोड पर ठेले लगाकर व्यापार कर रहे हैं। इसके चलते राहगीरों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। नगर पालिका प्रशासन मौन बैठा है और शहर की अव्यवस्था पर पर्दा डाल रहा है।

​📱 पिड़ावा टाइम्स विशेष: जनता पूछे सवाल​

  • जवाबदेही: 50 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?
  • ​सुरक्षा: क्या पुलिस को मंडी परिसर में हो रही अवैध गतिविधियों की जानकारी नहीं है?
  • ​इच्छाशक्ति की कमी: अधिकारियों का फोन न उठाना और प्रयासों को ‘असफल’ बताना क्या केवल बहाना है? क्या नगर पालिका के पास अपनी संपत्तियों को बचाने का कोई विजन नहीं है?

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