पिड़ावा। आज पूरा विश्व ‘णमोकार महामंत्र’ की पावन ऊर्जा से सराबोर है। इसी क्रम में 9 अप्रैल 2026 को विश्व णमोकार दिवस के शुभ अवसर पर पिड़ावा नगर के ऐतिहासिक श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन नवीन जिनालय जूना मंदिर (खंडूपुरा) में भक्ति का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सकल दिगम्बर जैन समाज पिड़ावा के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के स्त्री-पुरुषों और युवाओं ने भाग लेकर इस महामंत्र की आराधना की।
40 मिनट तक अखंड जाप और आध्यात्मिक ऊर्जा:
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण णमोकार मंत्र का सामूहिक और अनवरत जाप रहा। जूना मंदिर के पावन परिसर में समाज के श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर लगभग 40 मिनट तक बिना रुके ‘नमो अरिहंताणं’ की मधुर गूँज से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। उपस्थित धर्मावलंबियों ने हाथ जोड़कर और आँखें बंद कर एकाग्र चित्त से मंत्र की साधना की। इस सामूहिक जाप का उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत आत्म-शुद्धि था, बल्कि समूचे विश्व में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का संचार करना भी था।
विश्व शांति की मंगल कामना:
जाप के समापन पर ‘विश्व शांति’ की विशेष कामना की गई। जैन समाज के प्रबुद्धजनों ने बताया कि णमोकार मंत्र किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पंच परमेष्ठियों (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सर्व साधु) के गुणों की वंदना है। यह मंत्र जाति और पंथ की सीमाओं से परे संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। जूना मंदिर में हुए इस अनुष्ठान से खंडूपुरा क्षेत्र पूरी तरह धर्ममय हो गया।
यह भी पढ़े:-पंछावा माता की शरण में पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया! मत्था टेक मांगी क्षेत्र की खुशहाली;
शांति, संयम और सत्य का संकल्प:
आज के दिन श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में सत्य, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया। सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आधुनिक युग की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच, प्राचीन मंत्रों का जाप मन को शांत और आत्मा को उन्नत करने का सबसे सरल साधन है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भक्तों ने भगवान पार्श्वनाथ की आरती की और मंगल प्रसादी ग्रहण की।
Pirawa Times विशेष: मंत्रों की शक्ति और सामूहिक संकल्प
-
णमोकार की महिमा: यह मंत्र अनादि निधन है, जिसका कोई अंत नहीं। पिड़ावा के जूना मंदिर में 40 मिनट का अखंड जाप यह दर्शाता है कि नगर का जैन समाज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से कितना मजबूती से जुड़ा है।
-
सामूहिकता में बल: जब सैकड़ों कंठ एक स्वर में मंत्रोच्चार करते हैं, तो उससे उत्पन्न होने वाली तरंगें नकारात्मकता का नाश करती हैं। खंडूपुरा में आज यही ऊर्जा महसूस की गई।
-
शांति का संदेश: आज के युद्धग्रस्त और तनावपूर्ण वैश्विक परिवेश में ‘विश्व शांति’ की कामना करना समय की सबसे बड़ी मांग है। पिड़ावा से उठी यह प्रार्थना निश्चित ही सार्थक होगी।
-
युवाओं की भागीदारी: इस जाप में युवाओं और बच्चों की उपस्थिति सराहनीय रही, जो यह सुनिश्चित करती है कि हमारी संस्कारित परंपराएं सुरक्षित हाथों में हैं।
advertisement

महावीर मार्ग (पट्टी बाज़ार ) पिड़ावा






