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पिड़ावा में ‘हार्ट सेफ’ मिशन: अब हर हाथ बचाएगा जिंदगी! अस्पताल में दी गई CPR और इमरजेंसी रिस्पॉन्स की ट्रेनिंग; 58,000 लोग सीख चुके हैं जान बचाने का हुनर

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उप जिला चिकित्सालय पिड़ावा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया
उप जिला चिकित्सालय पिड़ावा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया
पिड़ावा। झालावाड़ जिले में चल रहा “हार्ट सेफ झालावाड़ अभियान” अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इसी कड़ी में आज उप जिला चिकित्सालय पिड़ावा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहाँ चिकित्सा कर्मियों और आमजन को आपातकालीन स्थितियों से निपटने का गुरुमंत्र दिया गया। इस कार्यशाला में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि ‘हैंड्स-ऑन’ ट्रेनिंग के जरिए यह सिखाया गया कि कैसे मौत के मुँह में जा रहे व्यक्ति को वापस लाया जा सकता है।

पिड़ावा में 'हार्ट सेफ' मिशन: अब हर हाथ बचाएगा जिंदगी
अब हर हाथ बचाएगा जिंदगी

​गोल्डन मिनट्स: मौत और जिंदगी के बीच की कड़ी:

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. साजिद खान के मार्गदर्शन एवं पीएमओ डॉ. इरशाद हुसैन के नेतृत्व में आयोजित इस सत्र में सीपीआर (CPR) और बीएलएस (BLS) पर विशेष जोर दिया गया। जिला सीपीआर नोडल अधिकारी डॉ. शुभम गिरिराज पाटीदार एवं त्रिलोक नागर ने डमी के माध्यम से प्रदर्शन करते हुए बताया कि जब किसी व्यक्ति की हृदय गति अचानक रुक (कार्डियक अरेस्ट) जाए, तो ‘गोल्डन मिनट्स’ (शुरुआती कीमती मिनट) में किस तरह सीने को पंप कर उसकी धड़कनें वापस शुरू की जा सकती हैं।

​बहुआयामी प्रशिक्षण: आग से लेकर सांप के डंक तक का समाधान:

कार्यशाला केवल हृदय रोगों तक सीमित नहीं रही। इसमें फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा), सर्पदंश प्रबंधन (सांप काटने पर प्राथमिक उपचार) और एचपीवी टीकाकरण (कैंसर से बचाव) जैसे संवेदनशील विषयों पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आपात स्थिति में घबराना नहीं, बल्कि सही तकनीक का उपयोग करना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।
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​58,000 से अधिक लोग हुए प्रशिक्षित:

डॉ. इरशाद हुसैन ने इस पहल की सराहना करते हुए एक उत्साहजनक आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि झालावाड़ जिले में अब तक 58,000 से अधिक लोगों को निःशुल्क सीपीआर लाइफ सेविंग स्किल सिखाई जा चुकी है। उन्होंने अपील की कि जो लोग यहाँ से सीखकर जा रहे हैं, वे इस हुनर को अपने घर, परिवार और मोहल्ले तक पहुँचाएँ, ताकि आपात स्थिति में मदद के लिए किसी डॉक्टर के आने का इंतज़ार न करना पड़े और मौके पर मौजूद व्यक्ति ही मसीहा बन सके।
उप जिला चिकित्सालय पिड़ावा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया
उप जिला चिकित्सालय पिड़ावा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया
​Pirawa Times विशेष: एक कदम सीखने का, कई जिंदगी बचाने का!
  • ​पिड़ावा की स्वास्थ्य क्रांति: उप जिला चिकित्सालय में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का होना यह दर्शाता है कि हमारा स्वास्थ्य विभाग अब केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जनता को ‘प्रिवेंटिव केयर’ के लिए तैयार कर रहा है।
  • ​कार्डियक अरेस्ट का बढ़ता खतरा: हाल के वर्षों में युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़े हैं। ऐसे में सीपीआर की ट्रेनिंग हर घर में कम से कम एक व्यक्ति को होना अनिवार्य होनी चाहिए।
  • ​सांप काटने पर अंधविश्वास से बचें: कार्यशाला में सर्पदंश प्रबंधन पर दी गई जानकारी ग्रामीण क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहाँ आज भी लोग झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय गंवा देते हैं।
  • ​प्रेरणा: यह अभियान सिखाता है कि हम सब मिलकर एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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