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साहब! क्या आप पिएंगे ये पानी? रायपुर में नलों से आ रहा पीला और बदबूदार पानी

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रायपुर में जलदाय विभाग की 'पीली करतूत'
नलों से उगल रहा मटमैला पानी, फिल्टर प्लांट के नाम पर जनता को पिलाया जा रहा

बर्तनों में जम रही गंदगी, आक्रोश में कस्बेवासी

रायपुर। (नाथू लाल टेलर) कस्बे में जलदाय विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। पिछले करीब 10 दिनों से कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में नलों के माध्यम से पीले और गंदे पानी की आपूर्ति की जा रही है। चंवली पुर्नगठित पेयजल परियोजना, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च कर शुद्ध पानी का दावा किया गया था, वह अब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है। स्थिति यह है कि लोग पानी को सीधे उपयोग में लेने के बजाय उसे व्यर्थ बहाने को मजबूर हैं या फिर घंटों तक फिटकरी से साफ करने के बाद ही इस्तेमाल कर पा रहे हैं।

​उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा: फिटकरी के भरोसे प्यास

​कस्बे के पीएमश्री राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के समीप रहने वाले उपभोक्ता मोहित जैन ने बताया कि पिछले 8 से 10 दिनों से लगातार पीले रंग का गंदा पानी आ रहा है। मोहित ने दर्द साझा करते हुए कहा, “पानी इतना गंदा है कि उसे सीधे पीया नहीं जा सकता। हम पानी को भरकर रखते हैं और फिर फिटकरी डालकर उसे साफ करते हैं, तब जाकर दूसरे-तीसरे दिन वह उपयोग के लायक हो पाता है।” हैरानी की बात यह है कि पानी को थोड़ी देर बर्तन में भरकर रखने पर नीचे पीला अवशिष्ट (मलबा) जमा हो जाता है, जो जल शोधन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
​इसी तरह रायपुर निवासी कैलाश सोनी ने बताया कि जलापूर्ति के दौरान पानी की गुणवत्ता इतनी खराब है कि वह किसी भी घरेलू काम के उपयोग में नहीं आ रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि या तो विभाग पानी को बिना फिल्टर किए ही सप्लाई कर रहा है, या फिर मुख्य पाइपलाइन में कहीं बड़ा लीकेज है, जिसके जरिए गंदा पानी और मिट्टी नलों तक पहुँच रही है।

​करोड़ों का फिल्टर प्लांट, फिर क्यों आ रहा गंदा पानी?

​रायपुर कस्बे में जलापूर्ति के लिए चंवली बांध पर चंवली पुर्नगठित पेयजल परियोजना के तहत जल शोधन संयंत्र (फिल्टर प्लांट) लगाया गया है। नियमतः बांध से पानी इस संयंत्र में आता है, जहाँ उसे आधुनिक मशीनों से फिल्टर कर शुद्ध किया जाता है और फिर पाइपलाइनों के जरिए कस्बे तक पहुँचाया जाता है।
​लेकिन पिछले एक पखवाड़े से यह पूरी व्यवस्था फेल नजर आ रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब बांध स्थल पर संयंत्र लगा है, तो फिर पानी पीला और मटमैला क्यों हो रहा है? क्या फिल्टर प्लांट की सफाई नहीं हो रही या फिर प्लांट के संचालन में भारी कोताही बरती जा रही है? विभाग के पास फिलहाल इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि यह गंदा पानी कहाँ से मिल रहा है।

​बीमारियों का डर: प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

​गंदे पानी की सप्लाई के कारण कस्बे में उल्टी, दस्त और पेट संबंधी बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि तत्काल पाइपलाइनों के लीकेज की जांच करवाई जाए और चंवली बांध स्थित फिल्टर प्लांट का निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार किया जाए। उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे।

​📱 Pirawa Times विशेष: जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़

  • ​विभागीय उदासीनता: 10 दिन से गंदा पानी आना यह दर्शाता है कि स्थानीय अधिकारियों को जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। क्या अधिकारियों के घर भी यही पीला पानी पहुँच रहा है?
  • ​लीकेज या भ्रष्टाचार? पाइपलाइनों के लीकेज को ठीक न करना और फिल्टर प्लांट के नाम पर घटिया सप्लाई देना कहीं न कहीं प्रशासनिक भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।
  • ​बजट का सदुपयोग कहाँ? चंवली पुनर्गठन परियोजना के नाम पर खर्च हुए सरकारी धन का क्या फायदा, जब लोगों को फिटकरी के सहारे पानी पीना पड़ रहा है?
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