BREAKING NEWS: • Cyber Security: Savdhan Rahein, Surakshit Rahein • चवली नदी के एनीकट में गेट नहीं लगे तो उठेगा एक और सवाल—क्या पानी खत्म होने के बाद शुरू होगा अवैध खनन? • पिड़ावा की सबसे बड़ी चुनौती: क्या राजू माली दूर कर पाएंगे वर्षों पुरानी ड्रेनेज समस्या? • पिड़ावा का सियासी खेल: चुनाव में अलग-अलग विकल्प, अध्यक्ष चुनाव में साथ-साथ! • पिड़ावा में शोक की लहर: अखंड हिंदू समाज अध्यक्ष महावीर लुहार का निधन • उप जिला अस्पताल पिड़ावा को मिली हाई क्वालिटी नेबुलाइजर मशीन, विमल जैन ने किया डोनेशन • पिड़ावा में अध्यक्ष पद सामान्य होते ही सियासी पारा चढ़ा, अब किसके सिर सजेगा नगर पालिका का ताज? • पिड़ावा नगर पालिका के 20 वार्डों का आरक्षण जारी, कहीं सामान्य तो कहीं महिला और ओबीसी को मौका • 17 अगस्त को खुलेगा पिड़ावा के 20 वार्डों का चुनावी पिटारा, आरक्षण लॉटरी पर टिकी दावेदारों की नजर • पिड़ावा नगर पालिका अध्यक्ष पद की लॉटरी में अनारक्षित सीट, सियासी समीकरण बदले
Home धर्म चवली नदी के तट पर चमत्कारी ‘पिपलिया खेड़ा बालाजी’: जहाँ बाबा खुद...

चवली नदी के तट पर चमत्कारी ‘पिपलिया खेड़ा बालाजी’: जहाँ बाबा खुद लिखकर देते हैं शादी की ‘पाती’; भक्तों की हर मुराद होती है पूरी

1
चवली नदी के तट पर चमत्कारी 'पिपलिया खेड़ा बालाजी
पिपलिया खेड़ा बालाजी': जहाँ बाबा खुद लिखकर देते हैं शादी की 'पाती'; भक्तों की हर मुराद होती है पूरी
रायपुर। ​आस्था और विश्वास की अटूट डोर जब भक्ति से जुड़ती है, तो चमत्कार को नमस्कार स्वयं होने लगता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा को स्पर्श करती चवली नदी के पावन तट पर स्थित श्री पिपलिया खेड़ा बालाजी धाम सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह धाम न केवल अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ होने वाले जीवंत अतिशय भक्तों को दूर-दूर से खींच लाते हैं। इंदौर-कोटा नेशनल हाईवे पर सोयत कला के समीप स्थित यह दरबार आज भी अनसुलझे रहस्यों और अटूट विश्वास की मिसाल है।

​शादी की ‘पाती’ और निर्विघ्न मंगल कार्य:

इस धाम की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता है ‘पाती लिखना’। क्षेत्र में मान्यता है कि विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त के लिए बालाजी के चरणों में अर्जी लगाई जाती है। इसके बाद मंदिर के पंडित जी द्वारा बालाजी की प्रेरणा से एक ‘पाती’ (अनुमति पत्र) लिखकर दी जाती है। भक्त इस पाती को भगवान का साक्षात आदेश मानकर विवाह संपन्न करते हैं। जनश्रुति है कि जो परिवार यहाँ से पाती ले जाकर कार्य करता है, उनके विवाह में कोई विघ्न नहीं आता और दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। यही कारण है कि नवविवाहित जोड़े आशीर्वाद लेने सबसे पहले यहाँ पहुँचते हैं।

​सूनी गोद में गूँजती है किलकारी:

पिपलिया खेड़ा बालाजी को ‘संकटमोचन’ के साथ-साथ ‘संतान प्रदाता’ भी माना जाता है। वे दंपत्ति जिनकी गोद सूनी है, यहाँ आकर विशेष अर्जी लगाते हैं। कहा जाता है कि बाबा के दरबार में ‘पालना’ बांधने की रस्म के बाद हजारों परिवारों की मुराद पूरी हुई है। इसके अलावा, बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह स्थान आशा की किरण है; बेहतर रोजगार और तरक्की के लिए यहाँ नारियल बांधकर मन्नत मांगी जाती है।

​दाल-बाटी-चूरमा का अनूठा भोग:

जब भक्तों की मन्नत पूरी होती है, तो वे अपनी श्रद्धा अनुसार बाबा को मालवा-राजस्थान का प्रसिद्ध दाल-बाटी-चूरमा का भोग लगाते हैं। विशेष रूप से अप्रैल से लेकर जुलाई तक की भीषण गर्मी में भी यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है। लोग सपरिवार चवली नदी के किनारे प्रसादी तैयार करते हैं और भंडारा करते हैं।

​45 वर्षों से अखंड गूँज रही है रामायण:

आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत इस स्थान पर लगभग 40-45 वर्ष पूर्व स्वर्गीय बापू लाल शर्मा (खेजरपुर) एवं स्थानीय निवासियों द्वारा रामायण मानस मंडल के तत्वाधान में अखंड रामायण पाठ शुरू किया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि दशकों बीत जाने के बाद भी यह पाठ आज तक अनवरत जारी है, जो इस क्षेत्र की पवित्रता को प्रमाणित करता है।
यह भी पढ़े:-आवारा कुत्तो का आतंक! 12 साल के मासूम सहित 14 लोगों को नोंचकर किया घायल

​भव्य मंदिर निर्माण की उठती मांग:

इतनी ख्याति और आस्था होने के बावजूद, भक्त और क्षेत्रीय नागरिक मंदिर के वर्तमान स्वरूप के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थान उज्जैन सिंहस्थ में जाने वाले यात्रियों के लिए एक बेहतर पड़ाव बन सकता है। यदि शासन-प्रशासन यहाँ भव्य मंदिर का निर्माण और यात्री सुविधाओं का विस्तार करे, तो यह क्षेत्र देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर उभर सकता है। वर्तमान में यहाँ पुलिस चौकी, पेयजल और धर्मशाला जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन भव्यता का अभाव है।
यह भी पढ़े:-खुशियों के बीच ‘मौत का करंट’! बारात में गए गेलानी के 25 वर्षीय युवक की बिजली की चपेट में आने से मौत
​Pirawa Times विशेष: सीमा पर खड़ा आस्था का प्रहरी
  • ​सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: चवली नदी केवल दो राज्यों की सीमा नहीं है, बल्कि यह राजस्थान और मध्य प्रदेश की साझा संस्कृति और भक्ति का संगम है। पिपलिया खेड़ा बालाजी दोनों राज्यों को एक सूत्र में पिरोते हैं।
  • ​पाती की परंपरा: डिजिटल युग में भी ‘पाती’ (लिखित आज्ञा) पर अटूट विश्वास यह दर्शाता है कि श्रद्धा के आगे तर्क मौन हो जाते हैं। यह परंपरा हमारी लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर है।
  • ​प्रशासन की अनदेखी: इतने प्राचीन और सिद्ध स्थान का अब तक भव्य विकास न होना चिंताजनक है। क्या जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय ही बाबा के मत्था टेकने आएंगे? अब समय है कि इस धाम को एक भव्य तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए।
  • ​आर्थिक विकास की संभावना: मंदिर का भव्य निर्माण न केवल भक्तों को सुविधा देगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
Rishabh Industries
Rishabh Industries
Near SBI Bank Pirawa

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!