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पिड़ावा में सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन: विश्व शांति महायज्ञ के साथ गूँजा सत्य-अहिंसा का संदेश

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सिद्ध चक्र मंडल विधान
सिद्ध चक्र मंडल विधान के दौरान मंदिर परिसर में उपस्थित महिलाएं
पिड़ावा। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वाधान में श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र (बड़ा मंदिर) में आयोजित आठ दिवसीय सिद्ध चक्र महा मंडल विधान का रविवार को विश्व शांति महायज्ञ के साथ भव्य समापन हुआ। पुण्यार्जक मंगला बहिनजी मोतीराज चेलावत परिवार के विशेष सहयोग से आयोजित इस अनुष्ठान में पिछले आठ दिनों से श्रद्धा और भक्ति का जो सैलाब उमड़ा, उसने पिड़ावा को लघु सम्मेद शिखर बना दिया।

भव्य शोभायात्रा
सिद्ध चक्र मंडल विधान के समापन पर निकाली गई शोभायात्रा

शोभायात्रा निकाली

विधान की पूर्णाहुति के पश्चात प्रातः 8:30 बजे बड़ा मंदिर से एक विशाल शोभायात्रा प्रारंभ हुई। शोभायात्रा का दृश्य अत्यंत मनमोहक था; सभी इंद्र अपनी गोद में और सिर पर ‘माँ जिनवाणी’ को विराजमान कर गौरव के साथ चल रहे थे, वहीं इन्द्राणियां सिर पर मंगल कलश धारण कर मंगल गान कर रही थीं। पुरुष वर्ग श्वेत वस्त्रों में सादगी का प्रतीक लग रहा था, तो महिलाएं मंडल की विशेष साड़ियों और केसरिया परिधानों में भक्ति नृत्य करती नजर आईं। यह शोभायात्रा पिपली चौक, शहर मोहल्ला, सेठान मोहल्ला, खांडूपुरा और नयापुरा होते हुए पुनः बड़ा मंदिर पहुंची, जहाँ धर्म की जय-जयकार हुई।

1024 अर्घ और विश्व शांति की कामना:

समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि शनिवार को विधान के दौरान भक्तिभाव से 1024 अर्घ समर्पित किए गए थे। रविवार सुबह मंत्रोच्चार के बीच विश्व शांति महायज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें आहुतियां देकर चराचर जगत के कल्याण की कामना की गई। बाल ब्रह्मचारिणी सविता दीदी (भोपाल) के कुशल निर्देशन और विधानाचार्य पं. राजकुमार जैन के नेतृत्व में संगीतकार हरिश गन्धर्व एंड पार्टी की सुमधुर लहरों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

प्रवचन: मोक्ष मार्ग का सूत्र है सिद्ध चक्र विधान:

समापन सत्र में सविता दीदी ने अपने संबोधन में कहा, “पिड़ावा के भक्तों की भक्ति दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। सिद्ध चक्र महामंडल विधान आत्मा की शुद्धि और मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने का सबसे सशक्त सूत्र है। इसमें नौ पदों के नौ तत्वों की मंडलाकार रूप में आराधना की जाती है, जिससे ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।” उन्होंने कहा कि यह विधान केवल क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा के विकारों को दूर करने का विज्ञान है।
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सम्मान:

ब्रह्मानंद सागर पाठशाला के अध्यापकों—निक्कु जैन, रक्षा जैन, सोनु जैन, रानी जैन और गोरी जैन के मार्गदर्शन में बच्चों ने आठ दिनों तक इंद्र दरबार और भगवान राम के जीवन पर आधारित सुंदर नाटिकाओं की प्रस्तुति दी। समाज द्वारा पुण्यार्जक परिवार (मंगला बहिनजी, कैलाश अक्षय, नरेंद्र सेक्रेटरी, अरविंद जैन) का भावभीना सम्मान किया गया।

वात्सल्य भोज और आभार:

विधान के समापन पर शहर मोहल्ला स्थित मांगलिक भवन में वात्सल्य भोज (स्वामी वात्सल्य) का आयोजन किया गया, जहाँ सकल दिगम्बर जैन समाज और बाहर से आए अतिथियों ने प्रेमपूर्वक प्रसादी ग्रहण की। अंत में विधान प्रभारी कैलाश अक्षय, नरेंद्र सेक्रेटरी, अरविंद जैन और निलेश चेलावत ने सभी का आभार व्यक्त किया। रात्रि में पुण्यार्जक परिवार के निवास पर मंगल गीतों के साथ इस दिव्य उत्सव की स्मृतियों को संजोया गया।
Pirawa Times विशेष: भक्ति की शक्ति और समाज की एकता
  • ऐतिहासिक आयोजन: पिड़ावा में इस स्तर का विधान और अनुशासन यह दर्शाता है कि यहाँ का जैन समाज अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा है।
  • अतिथि देवो भव: बाहर से आए अतिथियों का सत्कार और सामूहिक भोज पिड़ावा की मेहमाननवाजी और वात्सल्य भाव की मिसाल है।
  • संस्कारों की पाठशाला: पाठशाला के बच्चों द्वारा दी गई प्रस्तुतियां यह सुनिश्चित करती हैं कि जैन धर्म की विरासत नई पीढ़ी में सुरक्षित ढंग से हस्तांतरित हो रही है।
  • सिद्ध चक्र का महत्व: आधुनिक तनावपूर्ण जीवन में इस तरह के आध्यात्मिक अनुष्ठान मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करने के सशक्त माध्यम हैं।

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