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संतों के खून से कब तक सने रहेंगे हाईवे? पिड़ावा में जैन समाज का महा-आक्रोश; सांवलिया पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर से उपखंड कार्यालय तक फूटा मूक ज्वालामुखी

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सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देते हुए
सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देते हुए
पिड़ावा। ​मध्य प्रदेश के रीवा में जैन साधु-संतों के पैदल विहार के दौरान हुई एक भीषण और संदेहास्पद दुर्घटना ने पूरे देश के जैन समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना में विहार रत आर्यिका श्रुत मति माताजी एवं उपशम मति माताजी को एक कार चालक द्वारा बेरहमी से टक्कर मारकर असमय समाधि की ओर धकेल दिया गया। इस वीभत्स कांड के विरोध में आज सकल दिगंबर जैन समाज पिड़ावा के तत्वावधान में एक विशाल और ऐतिहासिक मौन जुलूस निकाला गया।

शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा मूक ज्वालामुखी

शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा मूक ज्वालामुखी
शहर के मुख्य मार्ग से गुजरा सकल दिगंबर जैन समाज का मोन जुलूस
यह मौन जुलूस सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से प्रारंभ हुआ। जुलूस में समाज के सैकड़ों पुरुष सफेद वस्त्रों में और महिलाएं केसरिया व साड़ियों में हाथों में संतों की सुरक्षा की तख्तियां लिए मौन धारण कर चल रहे थे। समाज का यह अनुशासित और मूक आक्रोश पूरे शहर के लिए चर्चा का विषय बना रहा। शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होता हुआ यह विशाल मौन जुलूस उपखंड कार्यालय परिसर पहुँचा, जहाँ समाज के लोगों ने अपनी वेदना और आक्रोश को बुलंद किया।
शहर के मुख्य मार्ग से गुजरा सकल दिगंबर जैन समाज का मोन जुलूस
शहर के मुख्य मार्ग से गुजरा सकल दिगंबर जैन समाज का मोन जुलूस

संजय भैया पठारी के नेतृत्व में SDM को सौंपा ज्ञापन:

उपखंड कार्यालय परिसर पहुँचने पर संजय भैया पठारी के नेतृत्व में सकल जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी (SDM) दिनेश कुमार मीणा को देश के सर्वोच्च नेतृत्व (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री) के नाम एक तीखा ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समाज ने रीवा दुर्घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक या एसआईटी (SIT) जाँच कराने और पूरे भारत में पैदल विहार करने वाले जैन संतों के लिए ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की पुरजोर मांग उठाई है।
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बड़ा सवाल: आखिर सरकारें क्यों साधे बैठी हैं ‘रहस्यमयी चुप्पी’?

​इस पूरे आंदोलन के दौरान पिड़ावा जैन समाज ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सबसे तीखा प्रहार किया। समाज के प्रबुद्ध वक्ताओं और विचारकों ने सीधे तौर पर व्यवस्था की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर कब तक अहिंसक जैन समाज के संतों को नेशनल हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों की तरह कुचला जाता रहेगा?

ठोस कदम उठाने में क्यों कांप रहे हैं सरकारों के हाथ?:

  1. वोट बैंक की राजनीति का शिकार: जैन समाज देश में सबसे शांतिप्रिय, कानून को मानने वाला और सबसे ज्यादा टैक्स देने वाला समाज है। यह समाज कभी सड़कों पर आगजनी नहीं करता, चक्काजाम नहीं करता और न ही हिंसक उपद्रव मचाता है। शायद शीर्ष नेतृत्व को लगता है कि इस समाज की नाराजगी से उनकी कुर्सियों को कोई खतरा नहीं है, इसलिए सरकारें इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं।
  2. नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) की घोर लापरवाही: केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के अधीन आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर संतों के पैदल विहार के लिए कोई विशेष कॉरिडोर या सुरक्षा संकेतक (Sign Boards) लगाने की जहमत आज तक नहीं उठाई गई।
  3. गृह मंत्रालयों की सुस्ती: संतों पर हमले और संदेहास्पद दुर्घटनाओं के मामलों को सामान्य हिट एंड रन (Hit and Run) केस मानकर रफा-दफा कर दिया जाता है। पुलिस को “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” के कड़े नियम जारी करने में व्यवस्था पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

आखिर निहत्थे संतों से किसे है परेशानी? क्यों रची जा रही है हत्या की साजिश?:

जैन समाज ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आखिर जो जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, उनसे किसी को क्या परेशानी हो सकती है? वे न तो कोई वीआईपी सुरक्षा लेते हैं, न ही आधुनिक सुख-सुविधाओं या वाहनों का उपयोग करते हैं। उनका पूरा जीवन केवल आत्म-कल्याण और समाज में शांति, संयम तथा सर्वधर्म समभाव का संदेश प्रसारित करने के लिए समर्पित होता है। इसके बावजूद, पिछले कुछ समय से देश के विभिन्न राजमार्गों पर जैन संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएँ, अभद्रता और जानलेवा हमले यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या यह भारत की आध्यात्मिक विरासत को नष्ट करने का कोई सुनियोजित प्रयास है?

ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें:

  1. SIT जाँच: रीवा प्रकरण की निष्पक्ष SIT अथवा न्यायिक जाँच कराई जाए।
  2. संत सुरक्षा नीति: भारत सरकार पैदल विहार करने वाले संतों की सुरक्षा हेतु एक ‘राष्ट्रीय गाइडलाइन’ और कड़ा कानून बनाए।
  3. विशेष संवेदनशील श्रेणी: संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को ‘फास्ट ट्रैक’ श्रेणी में रखकर त्वरित न्याय दिया जाए।
Pirawa Times विशेष: आध्यात्मिक भारत की अस्मिता का प्रश्न!
  • सांवलिया पार्श्वनाथ मंदिर से उठी गूँज: बड़ा मंदिर से शुरू हुआ यह मौन जुलूस इस बात का गवाह है कि जब बात संतों की अस्मिता और सुरक्षा पर आएगी, तो जैन समाज पूरी ताकत से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेगा।
  • संजय भैया पठारी का प्रभावी नेतृत्व: उपखंड कार्यालय पर संजय भैया पठारी के नेतृत्व में जिस तरह से समाज ने बिना किसी शोर-शराबे के केवल अपनी मौन उपस्थिति से एसडीएम दिनेश कुमार मीणा को अपनी गंभीर वेदना से अवगत कराया, वह प्रशासनिक अमले को सोचने पर मजबूर करने के लिए काफी है।
  • चेतावनी: दिल्ली की केंद्र सरकार यह न भूले कि समाज का यह मौन किसी बड़ी डिजिटल और लोकतांत्रिक क्रांति की शुरुआत हो सकता है। संतों के खून की एक-एक बूंद का हिसाब सरकारों को अपनी संवेदनशीलता दिखाकर करना ही होगा।

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