पिड़ावा। नगर पालिका क्षेत्र में आगामी नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। इस बार विवाद का केंद्र कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि वह ‘मतदाता सूची’ है जिसके आधार पर शहर की नई सरकार चुनी जानी है। ताजा घटनाक्रम में यह बात सामने आई है कि चुनाव आयोग ने नई मतदाता सूची तैयार करने में एसआईआर (SIR) की होस्टिंग लिस्ट की अनदेखी की है। इसके बजाय, 01.01.2025 की पुरानी सूची को आधार बनाकर नए वार्डों का ढांचा खड़ा कर दिया गया, जिसने पूरी चुनावी व्यवस्था को अनियमितताओं के दलदल में धकेल दिया है।
परिसीमन का मखौल: घर एक वार्ड में, वोट दूसरे में!
नगर में गत महीनों में वार्डों का नया परिसीमन किया गया था, जिसका उद्देश्य जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार के हिसाब से वार्डों को संतुलित करना था। लेकिन, नई मतदाता सूची तैयार करते समय इस परिसीमन की आत्मा को ही कुचल दिया गया। आरोप है कि परिसीमन के हिसाब से वार्डों का सही विभाजन नहीं किया गया। इसके कारण पिड़ावा के हर वार्ड में अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। कई मोहल्लों में मतदाताओं के घर तो एक वार्ड में आते हैं, लेकिन उनके नाम पड़ोसी वार्ड व दूर दराज वार्डो की मतदाता सूची में दर्ज कर दिए गए हैं।
आपत्तियों का सैलाब: हर वार्ड में छिड़ा ‘वोट युद्ध’
मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद शहर के ऐसे कई वार्ड है जहां आपत्तियों की झड़ी न लगी हो। वर्तमान में हर वार्ड के संभावित उम्मीदवार और जागरूक नागरिक अपनी-अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। एक तरफ जहाँ लोग अपने वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने पर आक्रोशित हैं, वहीं दूसरी तरफ रणनीतिक रूप से विरोधियों के समर्थकों के नाम दूसरे वार्डों में शिफ्ट कराने का खेल भी परदे के पीछे से चल रहा है। कई वार्डों में तो लगभग सैकड़ो आपत्तियां भी दर्ज कराई गई हैं।
एसडीएम कोर्ट में मैराथन सुनवाई शुरू
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और उपखंड अधिकारी (SDM) दिनेश कुमार मीणा ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्णायक कदम उठाया था। 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक दावे और आपत्तियां प्राप्त करने के बाद, अब इन पर विस्तृत सुनवाई (Hearing) का दौर शुरू हो गया है। एसडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, जिन मतदाताओं या जनप्रतिनिधियों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उन्हें बकायदा नोटिस जारी कर साक्ष्यों के साथ तलब किया जा रहा है। एसडीएम दिनेश कुमार मीणा स्वयं एक-एक वार्ड की फाइलों का अवलोकन कर रहे हैं ताकि विसंगतियों को दूर किया जा सके।
यह भी पढ़े :-पिड़ावा में ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ की गूँज! प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; “गो पालन मंत्रालय” बनाने और सख्त केंद्रीय कानून की उठी मांग
आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन?
नगर की जनता अब प्रशासन से सीधा सवाल पूछ रही है कि जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो फिर 01.01.2025 की सूची का उपयोग क्यों किया गया?
-
डाटा फीडिंग में चूक: क्या कंप्यूटर ऑपरेटरों और डाटा एंट्री टीम ने नए परिसीमन के नक्शों को सही ढंग से पोर्टल पर अपलोड नहीं किया?
-
बीएलओ की रिपोर्टिंग: क्या घर-घर सर्वे करने वाले प्रगणकों ने वार्डों की नई सीमाओं को दरकिनार कर केवल ऑफिस में बैठकर पुरानी सूचियों को ही ‘कॉपी-पेस्ट’ कर दिया गया।
इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय होना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि इससे न केवल सरकार के लाखों रुपये और समय की बर्बादी हुई है, बल्कि आम नागरिकों को भी तपती गर्मी में सरकारी कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
Pirawa Times विशेष: लोकतंत्र की बुनियाद पर ‘प्रशासनिक प्रहार’!
-
साख का सवाल: अगर मतदाता सूची ही दोषपूर्ण होगी, तो चुनाव परिणाम कभी भी निष्पक्ष नहीं माने जाएंगे। यह पिड़ावा के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए एक खतरनाक संकेत है।
-
जनता की पीड़ा: एक साधारण नागरिक के लिए अपने वोट की सही जगह तलाशना अब किसी ‘पहेली’ को सुलझाने जैसा हो गया है। एक गलती ने हज़ारों लोगों को मानसिक और शारीरिक परेशानी में डाल दिया है।
-
अधिकारियों को कड़ी चुनौती: एसडीएम दिनेश कुमार मीणा के लिए यह ‘अग्निपरीक्षा’ का समय है। उन्हें न केवल तकनीकी त्रुटियों को सुधारना है, बल्कि राजनीतिक दबावों से मुक्त होकर एक ऐसी सूची तैयार करनी है जिस पर कोई उंगली न उठा सके।
-
हमारा तीखा सवाल: क्या उन लापरवाह अधिकारियों और प्रगणकों पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिनकी वजह से आज पूरा शहर कतारों में खड़ा है?







बेहतरीन रिपोर्टिंग मुबारक बाद