रायपुर। कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में आज “विश्व रक्तदाता दिवस” के पावन अवसर पर रविवार को मानवता की सेवा की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। रायपुर में इस विशेष दिवस पर एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम और सम्मान समारोह का बेहद सफल आयोजन किया गया। इस प्रेरक कार्यक्रम में क्षेत्र के उन जांबाज और नियमित रक्तदाताओं का भव्य माल्यार्पण व मुंह मीठा करवाकर ऐतिहासिक सम्मान किया गया, जो बिना किसी स्वार्थ के लगातार रक्तदान कर अस्पतालों में तड़पते मरीजों की सांसें बहाल कर रहे हैं। इसके साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा रक्तदान के वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व पर बेहद गहराई से विचार व्यक्त किए गए।
रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं, मानव शरीर ही है एकमात्र जरिया:
समारोह के दौरान उपस्थित मुख्य वक्ताओं ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि रक्त (खून) जीवन को बचाने वाला सबसे अनमोल और रक्षक तत्व है, जिसका आज के इस आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी कोई कृत्रिम (आर्टिफिशियल) विकल्प तैयार नहीं किया जा सका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल मानव शरीर ही कुदरती रूप से रक्त का निर्माण कर सकता है, इसलिए किसी इंसान की जान बचाने के लिए दूसरे इंसान का रक्तदान करना ही एकमात्र जरिया है। वक्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जब तक व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा और सामान्य है, तब तक वह पूरी तरह सुरक्षित रहकर रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने से न केवल किसी मरते हुए मरीज की बहुमूल्य जान बचती है, बल्कि खुद रक्तदाता को भी अद्भुत मानसिक संतोष, आत्मिक शांति और नई शारीरिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
यह भी पढ़े:-नंदपुर-रायपुर में गरजे बुलडोजर, 12 अवैध आरा मशीनें जड़मूल से जमींदोज़; 5 रेंजों के चक्रव्यूह में फंसे लकड़ी माफिया, भारी सामग्री जब्त
रायपुर के इन ‘रियल हीरोज’ की रगों में बहता है सेवा का जज्बा:
इस सम्मान समारोह में रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के उन महारथियों को मंच पर सम्मानित किया गया जो रक्तदान का कीर्तिमान रच चुके हैं:
-
राकेश रावल (38 बार रक्तदान): अब तक लगभग 38 बार मानवता के लिए अपनी रगों का खून दे चुके राकेश रावल ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि रक्तदान करने के बाद जो आत्मिक सुख और रूहानी खुशी मिलती है, उसकी तुलना दुनिया के किसी वैभव से नहीं की जा सकती। उन्होंने संकल्प ले रखा है कि वे जीवन में हर वर्ष दो से चार बार नियमित रूप से रक्तदान करते रहेंगे।

रक्तवीर राकेश रावल -
राहुल सोनी (29 बार रक्तदान): अब तक 29 बार स्वेच्छा से रक्तदान कर चुके राहुल सोनी ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि वे हर साल नियम से दो बार ब्लड डोनेट करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मेरे शरीर के खून से किसी तड़पते हुए मासूम या मजबूर व्यक्ति की जान बचती है, तो यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। वे खुद रक्तदान करने के साथ-साथ अन्य युवाओं और समाज के लोगों को भी इसके लिए लगातार जागरूक और प्रेरित कर रहे हैं।
-
ओमप्रकाश सेन (25 बार रक्तदान): डावल निवासी ओमप्रकाश सेन को उनके द्वारा किए गए 25 बार के सराहनीय रक्तदान के लिए मंच पर विशेष रूप से माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।
-
भारत सिंह (5 बार रक्तदान): सेमली कल्याण निवासी भारत सिंह को भी 5 बार रक्तदान करने की इस बेहतरीन शुरुआत के लिए मुंह मीठा करवाकर और माला पहनाकर सम्मानित किया गया और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।

Blood Donation Day 2026
5 युवाओं को दिलाया रक्तदान का महा-संकल्प:
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित इन सभी अनुभवी रक्तदाताओं ने मंच से रक्तदान करने के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ और वैज्ञानिक फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे प्रभावित होकर मौके पर ही मौजूद 5 अन्य युवाओं ने भविष्य में नियमित रूप से रक्तदान करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि रक्तदान करके किसी का बुझता हुआ जीवन बचाना संसार का सबसे बड़ा पुणीत और ईश्वरीय कार्य है। इस गौरवमयी अवसर पर सेन समाज के जिलाध्यक्ष रामगोपाल सेन, आशीष सोनी, जगदीश प्रजापत सहित समूह के तमाम सम्मानित सदस्य और प्रबुद्ध नागरिक भारी संख्या में उपस्थित रहे।
पिड़ावा टाइम्स विशेष: रायपुर के इन जांबाजों को पूरे जिले का सलाम!
-
रक्तदाताओं की कहानी, युवाओं की जुबानी: राकेश रावल का 38 बार और राहुल सोनी का 29 बार रक्तदान करना कोई सामान्य बात नहीं है। यह उनके भीतर कूट-कूट कर भरी मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है। ‘पिड़ावा टाइम्स’ इन सभी महादानियों को कोटि-कोटि नमन करता है।
-
भ्रांतियों को तोड़ना जरूरी: आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंधविश्वास फैला हुआ है कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है, जबकि विज्ञान कहता है कि रक्तदान करने के कुछ ही दिनों के भीतर शरीर में नया और अधिक ऊर्जावान रक्त बन जाता है जो हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से बचाता है।
-
हमारा संदेश: रायपुर के इन हीरोज से प्रेरणा लेकर पिड़ावा उपखंड के प्रत्येक युवा को आगे आना चाहिए और अपने जन्मदिन या विशेष अवसरों पर रक्तदान करने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि हमारे क्षेत्र के किसी भी मरीज को झालावाड़ या कोटा के अस्पतालों में खून की कमी के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े।






