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चवली नदी का पानी शहर में घुसने से मची भारी तबाही, वाहन बहे और व्यापारियों को हुआ नुकसान; नगरवासियों ने पूछा—आखिर जिम्मेदार कौन?

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चवली नदी का रौद्र रूप
चवली नदी का रौद्र रूप

11 इंच बारिश ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल, ओमनी कार और कई बाइकें बहीं; व्यापारियों को नुकसान

पिड़ावा। सोमवार, 10 अगस्त 2026 को पिड़ावा क्षेत्र में हुई करीब 11 इंच मूसलाधार बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। तेज बारिश के बाद चवली नदी और आसपास के नदी-नालों का पानी उफान पर आ गया और देखते ही देखते नदी का पानी पिड़ावा शहर में घुस गया। शहर के कई हिस्सों में पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और निजी एवं सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा।

बारिश के बाद बने हालात से अब नगरवासियों में चवली नदी का गहरीकरण नहीं होने को लेकर गुस्सा दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से चवली नदी के गहरीकरण की मांग उठाई जाती रही है, लेकिन इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण हर बार तेज बारिश में शहर को जलभराव और बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ता है।
चवली नदी का रौद्र रूप
चवली नदी का रौद्र रूप

नदी का पानी शहर में घुसा, कई वाहन बहे

10 अगस्त की बारिश के दौरान चवली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और पानी शहर की ओर पहुंच गया। पानी के तेज बहाव में एक ओमनी कार बह गई, जिसे पानी उतरने के बाद बाहर निकाला गया तो वह चकनाचूर हालत में मिली। वहीं कई बाइकें भी नदी के तेज बहाव की चपेट में आकर बह गईं।
शहर के कई इलाकों में पानी भरने से व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ा। दुकानों और प्रतिष्ठानों में पानी घुसने से सामान प्रभावित हुआ। नगर पालिका की ओर से कुछ माह पहले लगाई गई जालियों को भी तेज बहाव के कारण नुकसान पहुंचा।
दुकानों में नदी का पानी घुसने से हुआ नुकसान
दुकानों में नदी का पानी घुसने से हुआ नुकसान
नदी के बहाव में बही कर को निकलते हुए
नदी के बहाव में बही कर को निकलते हुए

वर्षों से उठ रही गहरीकरण की मांग

नगरवासियों का कहना है कि चवली नदी का गहरीकरण समय की सबसे बड़ी जरूरत है। नागरिक मंच सहित शहर के लोगों द्वारा कई बार नगर पालिका को नदी के गहरीकरण की आवश्यकता से अवगत कराया गया। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से हर तेज बारिश में पिड़ावा के सामने नया संकट खड़ा हो जाता है।
लोगों का सवाल है कि यदि चवली नदी का समय रहते गहरीकरण किया जाता और उसकी जलधारण क्षमता बढ़ाई जाती, तो क्या 10 अगस्त को शहर में पानी इसी तरह घुसता? नगरवासियों का मानना है कि नदी की सफाई, गहरीकरण और उचित जल निकासी व्यवस्था से बारिश के पानी को शहर में प्रवेश करने से काफी हद तक रोका जा सकता था।

23 जुलाई 2021 की तबाही फिर हुई याद

10 अगस्त 2026 के हालात ने पिड़ावावासियों को 23 जुलाई 2021 की भारी बारिश की याद दिला दी। उस समय भी पिड़ावा में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे और शहर चारों ओर से पानी से घिर गया था। उस दिन करीब चार घंटे में 200 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी और पिड़ावा टापू जैसा दिखाई देने लगा था।
2021 के बाद अब 2026 में एक बार फिर चवली नदी के उफान का पानी शहर में पहुंचने से लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि पांच साल के अंतराल में दो बार ऐसी स्थिति सामने आ चुकी है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया।
निजी और सरकारी संपत्तियों के नुकसान का जिम्मेदार कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चवली नदी का गहरीकरण नहीं होने के कारण यदि बारिश का पानी शहर में घुसता है और लोगों की निजी संपत्ति के साथ सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
नगरवासियों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन ऐसे हालात में नुकसान कम करने के लिए पहले से आवश्यक इंतजाम किए जा सकते हैं। यदि नदी की जलधारण क्षमता बढ़ाई जाती, जल निकासी के रास्तों को दुरुस्त किया जाता और बारिश के पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था होती तो नुकसान को कम किया जा सकता था।

अब स्थायी समाधान की मांग

10 अगस्त की घटना के बाद पिड़ावावासियों की मांग है कि चवली नदी का तत्काल सर्वे करवाकर वैज्ञानिक तरीके से गहरीकरण कराया जाए। साथ ही शहर में पानी आने वाले सभी प्रमुख रास्तों और नालों की स्थिति की जांच कर जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
लोगों का कहना है कि हर बार बारिश के बाद नुकसान का आकलन करने के बजाय अब ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिससे अगली मूसलाधार बारिश में पिड़ावा फिर से जलमग्न न हो। 10 अगस्त की तबाही ने प्रशासन और नगर पालिका के सामने एक बार फिर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—चवली नदी का गहरीकरण आखिर कब होगा और अगली तबाही से पहले इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

1 COMMENT

  1. बारिश ने व्यवस्था की असली तस्वीर सामने ला दी 🌧️💧 अब स्थायी समाधान और जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है। 🙏🏽🏙️

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