पिड़ावा देशभर में चल रहे ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत पिड़ावा नगर और क्षेत्र के गोभक्तों ने एकजुट होकर हुंकार भरी है। अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं और सनातन धर्मावलंबियों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक महत्वपूर्ण ज्ञापन स्थानीय प्रशासन के माध्यम से सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए केंद्र सरकार से गोमाता की सुरक्षा, संवर्धन और उन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिलाने के लिए सशक्त केंद्रीय कानून बनाने की पुरजोर वकालत की गई है।
चिंताजनक स्थिति और सुरक्षा की दरकार:
ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि आधुनिकता की दौड़ में भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र कही जाने वाली गोमाता आज कई स्थानों पर असुरक्षित और उपेक्षित स्थिति में है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है जब केवल नारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि गोमाता की विधिवत सेवा और पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाना अनिवार्य है।
“गो पालन मंत्रालय” की स्थापना की मांग:
अभियान के तहत केंद्र सरकार के समक्ष एक बड़ा प्रस्ताव रखा गया है कि गोवंश संरक्षण के लिए एक पृथक “गो पालन मंत्रालय” की स्थापना की जाए। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि एक समर्पित मंत्रालय होने से देशभर में गोसेवा के कार्यों को संगठित रूप दिया जा सकेगा, गौशालाओं की स्थिति में सुधार होगा और गोवंश के नस्ल सुधार (ब्रिडिंग) पर वैज्ञानिक तरीके से कार्य किया जा सकेगा।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है गोवंश:
ज्ञापन में गोवंश के आर्थिक पहलू पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। इसमें उल्लेख किया गया कि गोवंश केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था की रीढ़ है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने के लिए गो-आधारित प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे न केवल जहरीले रसायनों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि किसानों की लागत कम होगी और उनकी आय में वृद्धि होगी।
संत समाज और नागरिकों का समर्थन:
कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस मांग को देशभर के संतों, गोभक्तों और आम नागरिकों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। ज्ञापन सौंपने के दौरान गोभक्तों ने संकल्प लिया कि जब तक गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा और कानूनी सुरक्षा नहीं मिल जाती, तब तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
Pirawa Times विशेष: आस्था और अर्थतंत्र का संगम
- राष्ट्रीय पहचान: गोमाता को भारतीय संस्कृति में ‘अघ्न्या’ (न मारने योग्य) कहा गया है। उनके सम्मान के लिए कानून की मांग करना सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- प्राकृतिक खेती की ओर कदम: चूँकि पिड़ावा एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, यहाँ गो-आधारित खेती को बढ़ावा देने से मिट्टी की उर्वरता और किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आ सकता है।
- संगठित प्रयास की आवश्यकता: ‘गो पालन मंत्रालय’ की मांग यह दर्शाती है कि समाज अब गो-सेवा को केवल चंदे या दान पर निर्भर न रखकर एक व्यवस्थित सरकारी ढांचे के अंतर्गत देखना चाहता है।
- समय की मांग: जिस तरह से गोवंश सड़कों पर हादसों का शिकार हो रहा है या तस्करी के मामले सामने आते हैं, एक सख्त केंद्रीय कानून ही इसका स्थायी समाधान हो सकता है।






