पिड़ावा। राज्य सरकार की मंशा थी कि शहरी सेवा शिविर-2026 के जरिए आमजन को उनके घर-द्वार पर राहत मिले, लेकिन पिड़ावा नगर पालिका में पहले ही दिन स्थानीय अधिकारियों की बेरुखी ने इस पर पानी फेर दिया। 12 जून से शुरू हुए इस शहरी सेवा शिविर को लेकर भले ही जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने दो दिन पहले कलेक्ट्रेट सभागार में 22 विभागों के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ मौके पर रहकर जनता के काम निपटाने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर अधिकारियों की लापरवाही और खाली कुर्सियां इस शिविर की सफलता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं।
‘पिड़ावा टाइम्स’ का रियलिटी चेक: दोपहर 12:10 बजे की कड़वी हकीकत:
शिविर के पहले दिन दावों की हकीकत जानने के लिए ‘पिड़ावा टाइम्स’ के संपादक द्वारा दोपहर ठीक 12:10 बजे नगर पालिका पिड़ावा में आयोजित शहरी सेवा शिविर का औचक जायजा लिया गया। ग्राउंड जीरो पर जो नजारा था, वह बेहद निराशाजनक था। सरकार और प्रशासन ने जिन कई विभागों के अधिकारियों को एक ही छत के नीचे बैठकर जनता की समस्याओं (जैसे नामांतरण, बिजली-पानी, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, और आधार-जनाधार) का निस्तारण करने का दावा किया था, उनमें से अधिकांश विभागों के काउंटर पूरी तरह सूने पड़े थे।
शिविर स्थल पर वार्डों की जनता तो अपनी अर्जियां लेकर उम्मीद से पहुँची थी, लेकिन अधिकारियों की खाली पड़ी कुर्सियां मानो चीख-चीख कर इस शिविर के कुप्रबंधन की गवाही दे रही थीं। वहां केवल नगर पालिका और महज एक-दो अन्य विभागों के ही गिने-चुने कर्मचारी दिखाई दिए, जो खुद व्यवस्थाओं को लेकर असमंजस में थे।
चिलचिलाती गर्मी में पानी-बिजली के जिम्मेदार ही गायब:
इस भीषण झुलसाती और चिलचिलाती गर्मी के मौसम में आम जनता के लिए सबसे बड़ी और अत्यधिक मूलभूत आवश्यकता पानी और बिजली की है। लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि शिविर में जलदाय विभाग (PHED) और विद्युत विभाग (डिस्कॉम) के बड़े अधिकारी मौजूद रहेंगे, जिससे उनके वार्डों में जारी पानी की किल्लत और अघोषित बिजली कटौती की समस्याओं का तुरंत समाधान हो सकेगा। लेकिन अफसोस! इन दोनों ही महत्वपूर्ण और अति-आवश्यक विभागों के काउंटर शुरू से ही पूरी तरह खाली पड़े रहे और इनके जिम्मेदार अधिकारी शिविर से सिरे से नदारद दिखाई दिए। पानी-बिजली के अफसरों का यह रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें जनता की बुनियादी तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है।
हाजिरी रजिस्टर में 14 दस्तखत, पर मौके पर रुचि शून्य!
पिड़ावा टाइम्स द्वारा जब मौके पर मौजूद उपस्थिति पंजीका (अटेंडेंस रजिस्टर) की पड़ताल की गई, तो उसमें भी बड़ा घालमेल नजर आया। पंजीका में कुल 14 लोगों के हस्ताक्षर जरूर मिले, लेकिन जब आयोजन स्थल पर काउंटरों की स्थिति देखी गई तो उनमें से अधिकतर गायब थे। रजिस्टर में हस्ताक्षर करने वाले भी अधिकांश कर्मचारी स्थानीय नगर पालिका के ही थे। अन्य महत्वपूर्ण विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण सरकारी शिविर में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और भीषण गर्मी में जनता को रामभरोसे छोड़ दिया।
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Pirawa Times विशेष: जनता परेशान, जिम्मेदार नदारद— इस लापरवाही का हिसाब कौन देगा?
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कलेक्टर साहब के आदेशों को ठेंगा: जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बैठक में साफ कहा था कि यह अभियान जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक बेहद संवेदनशील पहल है। लेकिन पिड़ावा नगर पालिका शिविर में पहुंचे लापरवाह अधिकारियों ने पहले ही दिन इस जन-हितैषी अभियान को मजाक बना दिया।
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चिलचिलाती धूप में भटकी जनता: भीषण गर्मी और झुलसाती धूप में जब वार्डों के बुजुर्ग, महिलाएं और गरीब लोग पेंशन सत्यापन, पट्टों की समस्या, राशन कार्ड में नाम जुड़वाने और बिजली-पानी की शिकायतें लेकर नगर पालिका परिसर में पहुंचे, तो उन्हें खाली काउंटरों को देखकर मायूस होकर बैरंग लौटना पड़ गया।
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हमारा सीधा सवाल: जब पहले ही दिन 22 विभागों के दावे हवा हो गए और कर्मचारी नदारद मिले, तो 15 जुलाई तक चलने वाले इस लंबे अभियान का पिड़ावा में क्या भविष्य होगा? क्या जिला कलेक्टर उन लापरवाह विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे, जिन्होंने सरकार के इस महत्वपूर्ण शिविर को अपनी लापरवाही से विफल बना दिया?






