रायपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में पैर पसार चुकीं अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर क्षेत्र के किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। भारतीय किसान संघ तहसील रायपुर के बैनर तले आज बड़ी संख्या में किसानों और पदाधिकारियों ने अस्पताल परिसर में पहुंचकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. साजिद खान को एक तीखा ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अस्पताल की चरमराई चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर विभाग के आला अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच करीब 3 घंटे तक मैराथन वार्ता चली, जिसमें संगठन ने एक-एक कर अस्पताल की पोल खोलकर रख दी।
इन प्रमुख मांगों पर अड़े किसान नेता:
वार्ता के दौरान भारतीय किसान संघ ने क्षेत्रवासियों एवं सुदूर गांवों से आने वाले गरीब किसानों की परेशानियों को प्रमुखता से उठाते हुए 7 सूत्रीय मांगें रखीं:
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नियमित सोनोग्राफी: रायपुर अस्पताल में प्रतिदिन नियमित रूप से सोनोग्राफी की सुविधा शुरू की जाए ताकि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को झालावाड़ न दौड़ना पड़े।
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समय पर हाजिरी: सभी डॉक्टरों, विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
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कर्मचारियों की लिस्ट: अस्पताल में तैनात सभी अधिकारी-कर्मचारियों की सूची और उनके कार्य का विवरण सूचना बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए।
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लापरवाहों पर कार्रवाई: लंबे समय से ड्यूटी से नदारद (अनुपस्थित) रहने वाले कर्मचारियों को हटाया जाए और उनके स्थान पर नए स्टाफ की नियुक्ति हो।
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दंत चिकित्सा का आधुनिकीकरण: दंत चिकित्सालय के लिए आधुनिक मशीनें और उपकरण तुरंत उपलब्ध करवाए जाएं।
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दवा व जांच योजना: मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा और जांच योजना के तहत सभी आवश्यक दवाइयां स्टोर में उपलब्ध रहें और हर प्रकार की जांच नियमित रूप से अस्पताल के भीतर ही हो।
बाहर की जांच लिखने पर जताई तीखी नाराजगी:
कल ही सीएमएचओ के निरीक्षण में सामने आए ‘निजी लैब कमिशनखोरी’ के खेल पर किसान संघ ने कड़ा रुख अपनाया। पदाधिकारियों ने साफ लहजे में कहा कि अस्पताल के डॉक्टर अपनी जेबें भरने के लिए गरीब किसानों को बाहर की निजी लैबों पर जांच के लिए पर्चियां लिख रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसान संघ ने विभाग को अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दी गई समय-सीमा के भीतर इन सभी समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो संगठन किसानों और आमजन को एकजुट कर अस्पताल के सामने उग्र आंदोलन और तालाबंदी करने पर मजबूर होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी चिकित्सा विभाग की रहेगी।
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